Indore Jansunwai Complaint: इंदौर। कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब हथौद-सोनगीर क्षेत्र की करीब ढाई करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन के कथित गलत नामांतरण का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता राम सिंह सोलंकी ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि उनके जीवित पिता को रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर जमीन का बंटवारा कर दिया गया और पूरी संपत्ति दूसरे पक्ष के नाम दर्ज कर दी गई।
Indore Jansunwai Complaint:सोलंकी ने जनसुनवाई में अधिकारियों को बताया कि उनकी पैतृक जमीन को लेकर की गई कार्रवाई की न तो कोई जानकारी दी गई, न नोटिस भेजा गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन का नामांतरण कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी करते हुए पूरी की गई।
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‘हमें अंधेरे में रखकर कर दिया फैसला’
Indore Jansunwai Complaint:शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस जमीन पर उनके परिवार का वैधानिक अधिकार है, उसे सीधे किशन जी के परिवार के नाम दर्ज कर दिया गया। मौजूदा बाजार मूल्य के अनुसार इस भूमि की कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये आंकी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता नहीं बरती गई और परिवार को पूरी प्रक्रिया से दूर रखा गया।
जनसुनवाई में उठाई न्याय की मांग
Indore Jansunwai Complaint:मामले को लेकर राम सिंह सोलंकी ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष दस्तावेज और अपनी आपत्ति प्रस्तुत करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच कराने और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया।
दो-तीन दिन में स्थिति स्पष्ट करने का भरोसा
Indore Jansunwai Complaint:शिकायतकर्ता के अनुसार अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि मामले की समीक्षा की जा रही है और दो से तीन दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। हालांकि सोलंकी का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
कलेक्टर के संज्ञान में पहुंचा मामला
Indore Jansunwai Complaint: यह पूरा मामला कलेक्टर शिवम वर्मा के संज्ञान में लाया गया है। जनसुनवाई के दौरान राजस्व मामलों के त्वरित और निष्पक्ष निराकरण के निर्देश भी दिए गए। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद प्रशासन इस विवादित नामांतरण प्रकरण में क्या कदम उठाता है।









