Rajim Mahanadi Accident: राजिम। राजिम-नवापारा क्षेत्र से गुजरने वाली जीवनदायिनी महानदी के तट पर चल रहे तटबंध निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों के उल्लंघन का एक बेहद दर्दनाक व संदेहास्पद मामला सामने आया है। निर्माण स्थल पर मजदूरी का कठिन कार्य कर रहे महज 16 वर्ष के एक किशोर मजदूर हर्ष साहू की अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने और बेहोश होकर गिरने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही क्षेत्र में अवैध बाल श्रम कराने, भीषण गर्मी में मूलभूत विधिक सुविधाएं न देने और निर्माण कार्य को समय से पहले पूरा करने के लिए मजदूरों पर मानसिक दबाव बनाने को लेकर जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित सरकारी निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर विधिक सवाल खड़े हो गए हैं।
धमतरी के खुरसेंगा का रहने वाला था मृतक हर्ष; कोलियारी-पारागांव के बीच चल रहा था काम
स्थानीय प्रशासनिक एवं पुलिस सूत्रों से प्राप्त विधिक जानकारी के अनुसार, मृतक किशोर हर्ष साहू (उम्र 16 वर्ष) मूल रूप से धमतरी जिले के कुरूद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खुरसेंगा का निवासी था। वह अपनी आर्थिक पारिवारिक विवशताओं के कारण राजिम क्षेत्र के ग्राम कोलियारी और पारागांव के मध्य महानदी के किनारे चल रहे भारी-भरकम तटबंध निर्माण (Embankment Construction) कार्य में बतौर दैनिक वेतनभोगी मजदूर के रूप में कार्य कर रहा था।
गवाहों के अनुसार, रविवार सुबह जब चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच निर्माण कार्य प्रगति पर था, तभी अचानक हर्ष को सिर में तेज चक्कर आया और वह अचेत होकर सीधे जमीन पर गिर पड़ा। निर्माण स्थल पर मौजूद साथी मजदूरों ने आनन-फानन में उसे तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी कुरूद सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक विधिक चिकित्सा सहायता देने के बाद भी जब उसकी नाजुक हालत में सुधार नहीं हुआ, तो उसे अत्यंत गंभीर स्थिति में गोबरा नवापारा अस्पताल के लिए रेफर किया गया। परंतु, दुर्भाग्यवश अस्पताल की दहलीज पर पहुंचने से पूर्व ही उसने दम तोड़ दिया और डॉक्टरों ने उसे विधिक रूप से ‘मृत घोषित’ (Brought Dead) कर दिया।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप: न पीने का साफ पानी, न हेलमेट; श्रम कानूनों की उड़ीं धज्जियां
इस असमय और दर्दनाक मौत के बाद निर्माण स्थल के आसपास के ग्रामीणों और श्रमिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों ने विधिक जांच की मांग करते हुए कार्यस्थल की दुर्दशा पर कई संगीन आरोप लगाए हैं:
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सुरक्षा उपकरणों का अभाव: इतने बड़े और जोखिम भरे तटबंध निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को बुनियादी सुरक्षा उपकरण जैसे सेफ्टी हेलमेट, बूट्स या दस्ताने तक मुहैया नहीं कराए गए थे।
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मूलभूत सुविधाओं की कमी: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच चल रहे इस काम में मजदूरों के लिए कार्यस्थल पर शीतल पेयजल (पीने का पानी), ओआरएस (ORS) के पैकेट अथवा किसी आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid Kit) की कोई विधिक व्यवस्था ठेकेदार द्वारा नहीं की गई थी।
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समय का मानसिक दबाव: मानसून की आमद से पहले काम को आनन-फानन में निपटाने के विधिक दबाव में मजदूरों से बिना उचित आराम के लगातार कठिन परिस्थितियों में अत्यधिक शारीरिक श्रम कराया जा रहा था, जो कि सीधे तौर पर मानव अधिकारों का उल्लंघन है।
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि यदि निर्माण स्थल पर समय रहते श्रम नियमों के अनुसार छाया, पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा की विधिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई होती, तो संभवतः इस मासूम किशोर मजदूर की जान को असमय काल के गाल में समाने से बचाया जा सकता था।
गोबरा नवापारा पुलिस ने दर्ज किया मर्ग; पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी विधिक कार्रवाई
घटना की विधिक संवेदनशीलता को देखते हुए गोबरा नवापारा थाना पुलिस ने तत्काल संज्ञान लिया है। पुलिस ने शव को अपने नियंत्रण में लेकर विधिक रूप से मर्ग कायम कर लिया है और शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम (Post Mortem) के लिए भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला चूंकि एक नाबालिग/किशोर की कार्यस्थल पर मौत से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें श्रम विभाग (Labour Department) को भी आधिकारिक रिपोर्ट भेजी जा रही है। पोस्टमार्टम की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों (जैसे हीट स्ट्रोक या अत्यधिक शारीरिक थकान) का विधिक खुलासा हो सकेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा लापरवाही, बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन अथवा विधिक सुविधाओं की कमी प्रमाणित होती है, तो दोषी ठेकेदार और निर्माण एजेंसी के प्रबंधकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









