Mahakal Raja Swaroop: उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध और देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार (24 मई 2026) को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का दिव्य और राजाधिराज स्वरूप का अनूठा श्रृंगार किया गया। तड़के होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी का चंद्र, त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू अर्पित कर राजा के रूप में सजाया गया। मान्यता है कि महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। रविवार तड़के हुए इस अलौकिक विग्रह के दर्शन कर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
तड़के 4 बजे खुले पट; पंचामृत और फलों के रस से हुआ महाअभिषेक
प्रथा के अनुसार, रविवार भोर में ठीक चार बजे शंख-ध्वनि और डमरू की गूंज के साथ महाकालेश्वर मंदिर के कपाट (पट) खोले गए। पट खुलते ही गर्भगृह में मौजूद पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले स्थान देवता और गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिक पूजन किया। इसके पश्चात, भगवान महाकाल का शुद्ध शीतल जल से जलाभिषेक किया गया।
मुख्य अनुष्ठान के तहत बाबा महाकाल का दूध, दही, शुद्ध घी, शक्कर और ताजे फलों के रस से तैयार पंचामृत से पूर्ण वैभव के साथ अभिषेक और पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान पुजारियों द्वारा सतत वेद मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
भांग से त्रिपुंड और वस्त्र से ढंककर रमाई गई भस्म
अभिषेक के पश्चात, भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू की आकृति के साथ दिव्य भांग, चंदन और सूखे मेवों का लेपन कर विशेष नयनाभिराम श्रृंगार किया गया। इसके बाद, परंपरा के अनुसार ‘हरि ओम’ का पवित्र जल अर्पित किया गया और कपूर आरती संपन्न हुई। श्रृंगार पूर्ण होने पर ज्योतिर्लिंग को एक स्वच्छ सूती वस्त्र से पूरी तरह ढंक दिया गया और फिर महानिर्वाणी अखाड़े के संतों द्वारा भगवान महाकाल पर बाबा की प्रिय भस्म अर्पित की गई (भस्म रमाई गई)।
शेषनाग का रजत मुकुट और मोगरा-गुलाब की मालाओं का भोग
भस्म आरती की विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद, राजा स्वरूप को अंतिम रूप देते हुए भगवान महाकाल को शेषनाग का अत्यंत आकर्षक रजत मुकुट (चांदी का मुकुट), रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की बड़ी मालाएं धारण कराई गईं। साथ ही, ग्रीष्म ऋतु की शीतलता को ध्यान में रखते हुए बाबा को ताजे मोगरे और लाल गुलाब के सुगंधित पुष्पों से तैयार की गई मनमोहक मालाएं अर्पित की गईं।
श्रृंगार के उपरांत मंदिर प्रशासन और पुजारियों की ओर से बाबा महाकाल को मौसमी फलों और विभिन्न प्रकार के मिष्ठानों (पेड़े और हलवे) का महाभोग लगाया गया। अंत में महाआरती संपन्न हुई, जिसमें भस्म आरती की अनुमति प्राप्त कर कतारबद्ध बैठे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य लाभ अर्जित किया।








