Water Tank Cooling: नई दिल्ली। मई के महीने में देश भर में सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। आगामी 25 मई से नौतपा की शुरुआत होने वाली है, जिससे तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है। इस भीषण गर्मी में घरों के भीतर सबसे बड़ी समस्या तब खड़ी होती है, जब दोपहर या शाम के वक्त नहाने या हाथ-मुंह धोने के लिए नल चालू किया जाता है और छत पर रखी टंकी से खौलता हुआ गर्म पानी आने लगता है। खासकर काले रंग की प्लास्टिक टंकियों में यह समस्या सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि काला रंग धूप (सौर विकिरण) को सबसे ज्यादा सोखता है। अगर आप भी इस खौलते पानी से परेशान हैं, तो बिना ज्यादा पैसे खर्च किए कुछ आसान वैज्ञानिक और घरेलू उपायों (देसी जुगाड़) की मदद से अपनी टंकी के पानी को काफी हद तक ठंडा रख सकते हैं।
1. काले रंग की टंकी पर करें सफेद पेंट या रिफ्लेक्टिव कोटिंग
विज्ञान का सीधा नियम है कि काला रंग प्रकाश और गर्मी को अवशोषित (Absorb) करता है, जबकि सफेद रंग उसे परावर्तित (Reflect) कर देता है। यदि आपकी छत पर काले रंग की पानी की टंकी लगी है, तो उसके बाहरी हिस्से पर अच्छी गुणवत्ता का सफेद चूना, सफेद पेंट या हीट रिफ्लेक्टिव कोटिंग करवा दें। इससे सूरज की किरणें टंकी की सतह से टकराकर वापस लौट जाएंगी और टंकी के अंदर का तापमान काफी कम रहेगा।
2. थर्माकोल शीट, इंसुलेशन सामग्री या रेडीमेड कवर
टंकी को बाहर की गर्मी से बचाने के लिए ‘थर्माकोल शीट’ एक बेहतरीन और सस्ता इंसुलेटर है। आप बाजार से थर्माकोल की मोटी शीट लाकर उसे टंकी के चारों तरफ मजबूती से बांध सकते हैं। इसके अलावा, आजकल मार्केट में वाटरप्रूफ और यूवी (UV) प्रोटेक्टेड ‘इंसुलेटेड टैंक कवर’ भी रेडीमेड मिलते हैं। इन्हें जैकेट की तरह टंकी के ऊपर पहना दिया जाता है, जिससे बाहर की भीषण लू और गर्मी का असर टंकी के भीतर मौजूद पानी पर नहीं पड़ता।
3. जूट के गीले बोरे लपेटना (इवेपोरेशन तकनीक)
यह एक बेहद पुराना, पारंपरिक और अचूक देसी तरीका है। आप पुराने जूट के बोरे (बारदाना) को पानी में अच्छी तरह भिगोकर टंकी के चारों ओर लपेट दें। दिन में एक या दो बार इन बोरों पर थोड़ा सा पानी डालते रहें ताकि उनमें नमी बनी रहे। बोरों से होने वाली पानी के वाष्पीकरण (Evaporation) की यह प्राकृतिक प्रक्रिया टंकी की बाहरी सतह को लगातार ठंडा रखेगी। हालांकि, अत्यधिक तीव्र गर्मी में बोरों को बार-बार भिगोना थोड़ा मेहनत का काम जरूर हो सकता है।
4. ग्रीन नेट, नारियल के पत्ते या अस्थायी शेड
जिन इलाकों में पारा 44-45 डिग्री से ऊपर चला जाता है, वहां टंकी के ऊपर एक ‘अस्थायी शेड’ (छाया) बना देना सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है। आप अपनी छत पर बांस या लोहे के पाइप के सहारे टंकी के ऊपर ‘ग्रीन नेट’ (हरी जाली) लगा सकते हैं। ग्रामीण या कस्बाई इलाकों में नारियल के पत्तों या सूखी घास का छप्पर बनाकर भी टंकी को ढका जा सकता है। इससे टंकी पर सीधी धूप नहीं पड़ती और पानी सामान्य बना रहता है।
5. गीली रेत का घेरा और पाइपलाइन का इंसुलेशन
एक और कारगर उपाय यह है कि यदि संभव हो, तो टंकी के आधार (नीचे) के चारों तरफ ईंटों की एक छोटी सी सीमा या क्यारी बना लें और उसमें बारीक रेत (बालू) भर दें। इस रेत को नियमित रूप से गिला करते रहें। इस नमी की वजह से टंकी के आसपास का स्थानीय तापमान काफी कम हो जाता है।
विशेष नोट— सिर्फ टंकी नहीं, पाइप को भी ढकें: अक्सर लोगों को यह गलतफहमी होती है कि पानी सिर्फ टंकी की वजह से गर्म हो रहा है। लेकिन कई बार छत और दीवारों पर खुले पड़े प्लास्टिक या लोहे के पाइप सीधे धूप के संपर्क में आकर पानी को खौला देते हैं। इसलिए, नलों तक ठंडा पानी पहुंचाने के लिए इन पाइपों के ऊपर इंसुलेशन फोम, मोटा सूती कपड़ा या कवर लपेटना बेहद जरूरी है। इन छोटे-छोटे और बजट-फ्रेंडली उपायों को अपनाकर आप इस तपते मौसम में भी ठंडे पानी का आनंद ले सकते हैं।









