Anti Black Marketing: महासमुंद। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले महासमुंद जिले में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के कड़े रुख के बाद जिले के विभिन्न विकासखंडों में खाद-बीज और उर्वरक प्रतिष्ठानों पर सघन निगरानी और औचक निरीक्षण का महाअभियान छेड़ दिया गया है। इसी कड़ी में सरायपाली और महासमुंद विकासखंड में गठित संयुक्त राजस्व एवं कृषि विभाग की टीमों ने कई बड़े प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। इस दौरान सरायपाली के एक बड़े खाद प्रतिष्ठान में भारी गड़बड़ी उजागर होने के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लेते हुए पूरा स्टॉक जब्त कर लिया है।
भौतिक सत्यापन में खुली पोल, स्टॉक से गायब मिलीं 298 बोरियां
विभागीय अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरायपाली विकासखंड में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सुश्री अनुपमा आनंद और तहसीलदार श्रीधर पंडा के सीधे नेतृत्व में ‘ओम फर्टिलाइज़र’ नामक निजी कृषि प्रतिष्ठान का औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया गया। जांच टीम ने जब दुकान और गोदाम में रखे वास्तविक स्टॉक का मिलान विक्रेता के आधिकारिक स्टॉक रजिस्टर से किया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। मौके पर रिकॉर्ड की तुलना में सीधे 298 बोरी रासायनिक खाद कम पाई गई। इतनी बड़ी मात्रा में खाद का अंतर मिलना सीधे तौर पर अवैध बिक्री, जमाखोरी या कालाबाजारी की गंभीर अनियमितता को प्रमाणित करता है।
इस गंभीर लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी को देखते हुए प्रशासनिक टीम ने ओम फर्टिलाइज़र के मौके पर उपलब्ध संपूर्ण बचे हुए खाद स्टॉक को तत्काल प्रभाव से जब्त (सील) कर लिया। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित फर्म का विक्रेता लाइसेंस निलंबित या रद्द करने जैसी आगामी कड़ी वैधानिक कार्रवाई के लिए विस्तृत जांच प्रस्ताव जिला कृषि विभाग को भेज दिया है।
महासमुंद विकासखंड के बग्गा कृषि केंद्र और मार्कफेड गोदामों में भी जांच
कलेक्टर के निर्देश पर केवल सरायपाली ही नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय से लगे महासमुंद विकासखंड में भी तहसीलदार जुगल किशोर पटेल के नेतृत्व में व्यापक चेकिंग चलाई गई। टीम द्वारा क्षेत्र के प्रतिष्ठित ‘बग्गा कृषि सेवा केंद्र’ की दुकान व उनके निजी गोदामों सहित शासकीय ‘मार्कफेड खाद गोदाम तुमाडबरी’ का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने शासकीय एवं निजी दोनों क्षेत्रों में खाद एवं उर्वरकों के भंडारण, उठाव, वितरण व्यवस्था और पॉस (POS) मशीन की प्रविष्टियों सहित संबंधित सभी महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेखों की गहनता से पड़ताल की।
कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर सीधे दर्ज होगी एफआईआर
इस व्यापक कार्रवाई के बाद महासमुंद जिला प्रशासन ने जिले के सभी शासकीय, अर्धशासकीय और निजी खाद-बीज और कीटनाशक विक्रेताओं को कड़े लहजे में चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने दोटूक कहा है कि सभी प्रतिष्ठान अपनी दुकानों और गोदामों के स्टॉक रजिस्टर को प्रतिदिन अनिवार्य रूप से अपडेट रखें। यदि भविष्य में किसी भी आकस्मिक निरीक्षण के दौरान भौतिक स्टॉक और दस्तावेजों में रत्ती भर भी विसंगति या अंतर पाया गया, तो संबंधित डीलर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और उनका व्यावसायिक लाइसेंस हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चिलचिलाती धूप में मेहनत करने वाले अन्नदाता किसानों के हितों और उनके अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा तथा पूरी वितरण प्रणाली को शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाने के लिए ऐसे औचक निरीक्षण आगे भी बिना किसी पूर्व सूचना के निरंतर जारी रहेंगे।









