NCC Camp 2026: एनसीसी प्रशिक्षण शिविर में पुलिस की पाठशाला, कैडेट्स को सिखाए सड़क सुरक्षा, साइबर क्राइम और पॉक्सो एक्ट के नियम

NCC Camp 2026: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। सेंट जेवियर स्कूल बोइरदादर में आयोजित एनसीसी संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-126 के दौरान रायगढ़ पुलिस द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इस अभियान में जिला यातायात और साइबर थाने के विशेषज्ञ अधिकारी-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। पुलिस की इस विशेष टीम ने शिविर में मौजूद एनसीसी कैडेट्स को सुरक्षित यातायात, बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और नशा मुक्ति के संबंध में विस्तार से जागरूक किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को कानून के प्रति सजग और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना है।

अनुशासन और टीम वर्क ही एनसीसी की पहचान: कर्नल तेवतिया

शिविर को संबोधित करते हुए 28th बटालियन के कर्नल प्रवीण तेवतिया ने कैडेट्स में देशभक्ति का जज्बा भरा। उन्होंने कहा कि अनुशासन, एकता और राष्ट्रसेवा की भावना ही एनसीसी की असली पहचान है। उन्होंने युवाओं को जीवन में समय का पालन करने, जिम्मेदारी उठाने, टीम वर्क और हमेशा सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया। कर्नल तेवतिया ने स्पष्ट किया कि एनसीसी सिर्फ एक शारीरिक प्रशिक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास पैदा करने का सबसे बड़ा मंच है। उन्होंने कैडेट्स से अपील की कि वे नशे और गलत संगति से पूरी तरह दूर रहकर अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल और देशहित के कार्यों में लगाएं।

स्टंटबाजी और मोबाइल का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी

ट्रैफिक डीएसपी श्री उत्तम प्रताप सिंह ने सड़क सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर कैडेट्स से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना हर नागरिक का बुनियादी कर्तव्य है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भी किसी हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर सकती है। डीएसपी ट्रैफिक ने बताया कि तेज रफ्तार, सड़कों पर स्टंटबाजी, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना, शराब पीकर ड्राइविंग और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाना ही आज के समय में अधिकांश सड़क हादसों की मुख्य वजह हैं। उन्होंने कैडेट्स को समझाया कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाना कानूनन अपराध तो है ही, साथ ही यह दूसरों की जान को भी जोखिम में डालता है।

डिजिटल दुनिया के खतरों से बचने के दिए टिप्स

वर्तमान डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर भी कैडेट्स को विस्तार से सतर्क किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आजकल सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी के फर्जी लिंक और साइबर बुलिंग जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। अपराधी मासूम बच्चों और युवाओं को लालच या डर दिखाकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। पुलिस टीम ने कैडेट्स को गुरुमंत्र दिया कि वे कभी भी किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, न ही अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी से साझा करें। इसके साथ ही इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत से होने वाले मानसिक और आर्थिक नुकसान के प्रति भी सचेत किया गया।

‘गुड टच-बैड टच’ और पॉक्सो एक्ट पर खुलकर बात

कार्यक्रम में बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की संवेदनशीलता पर विशेष रूप से चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने कैडेट्स को समझाया कि पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने वाला एक बेहद सख्त कानून है। बच्चों के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की गलत हरकत या ऑनलाइन उत्पीड़न को छिपाने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षकों या पुलिस को बताना चाहिए। कैडेट्स को “गुड टच और बैड टच” का फर्क भी समझाया गया। कार्यक्रम के अंत में एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के संदेश “जागरूक युवा ही सुरक्षित समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं” के साथ सभी कैडेट्स को यातायात नियमों के पालन की शपथ दिलाई गई।

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