Sheopur News: श्योपुर नगर पालिका परिषद इन दिनों अपनी कथित चुनिंदा अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर विवादों में घिर गई है। शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर पालिका की सरकारी JCB मशीन के दस्तावेजों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिस मशीन को प्रशासन ‘कानून का हथियार’ बनाकर अतिक्रमण हटाने भेज रहा था, वह खुद सरकारी रिकॉर्ड में वर्षों से बिना फिटनेस और बिना इंश्योरेंस के दर्ज है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद श्योपुर द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही JCB मशीन क्रमांक MP31D0114 के दस्तावेजों की पड़ताल मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की वेबसाइट पर की गई। वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इस सरकारी JCB का बीमा वर्ष 2003 में ही समाप्त हो चुका है। इसके बाद से आज तक उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। यानी यह भारी वाहन करीब 23 वर्षों से बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहा है।
इतना ही नहीं, परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इस कमर्शियल वाहन की फिटनेस भी वर्ष 2017 में समाप्त हो चुकी है। यानी पिछले 9 वर्षों से यह वाहन कागजों पर पूरी तरह अनफिट घोषित है। इसके बावजूद नगर पालिका इसी मशीन का उपयोग अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई में कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका आम नागरिकों पर नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई करती है, तब खुद नगर पालिका द्वारा बिना फिटनेस और बिना इंश्योरेंस वाले वाहन का उपयोग कैसे किया जा सकता है? यदि इस भारी मशीन से किसी प्रकार का हादसा हो जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
इस पूरे मामले में नगर पालिका की कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे मौजूद कई अन्य अतिक्रमणों को बिना छुए छोड़ दिया गया, जबकि बीच में स्थित एक ‘व्यक्ति विशेष’ के निर्माण को निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह कार्रवाई निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया थी या फिर किसी निजी खुन्नस अथवा दबाव में की गई कार्रवाई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में अतिक्रमण हटाने की निष्पक्ष मुहिम चला रहा था, तो फिर आसपास मौजूद अन्य निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। केवल एक निर्माण को चुनकर ढहाना प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका के अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। वहीं शहर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी लोग नगर पालिका की कार्यप्रणाली और सरकारी वाहनों के रखरखाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आम लोगों के वाहनों के फिटनेस और दस्तावेजों की जांच कर चालान काटे जाते हैं, तो सरकारी वाहनों पर भी वही नियम लागू होने चाहिए। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इस खुलासे के बाद क्या कदम उठाते हैं और क्या बिना दस्तावेजों वाली इस सरकारी JCB पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।









