Fake Caste Certificate Case : भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी करने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस अनुसूचित जाति (SC) विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने सतना के तत्कालीन एसडीएम राजेश शाही पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत दर्ज कराई है। अहिरवार ने मांग की है कि अपात्रों को एससी-एसटी प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में दोषी अधिकारी पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
“बागरी” उपनाम की समानता का फायदा प्रदीप अहिरवार का आरोप है कि विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों (सतना, रीवा, पन्ना आदि) में ‘बागरी’ समुदाय राजपूत श्रेणी में आता है, जबकि मालवा-निमाड़ क्षेत्र में इसी नाम का समुदाय अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि नाम की इसी समानता का अनुचित लाभ उठाकर और प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ कर अपात्र लोग फर्जी प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। अहिरवार ने कहा कि इससे वास्तविक पात्र वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
वंदना बागरी का प्रमाण पत्र बना आधार शिकायत में मुख्य रूप से वर्ष 2021 में वंदना बागरी के नाम से जारी एक जाति प्रमाण पत्र का उल्लेख किया गया है, जिसे जांच के बाद फर्जी पाए जाने पर निरस्त कर दिया गया था। अहिरवार का आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम राजेश शाही ने कथित रूप से कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाण पत्र जारी किया था। उन्होंने इसे जालसाजी और भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला बताया है।
कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कांग्रेस नेता ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और EOW को भेजी अपनी शिकायत में आरोपी अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के साथ-साथ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने तत्कालीन एसडीएम के कार्यकाल के दौरान जारी सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों की फोरेंसिक जांच कराने, उनकी पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ रोकने तथा उनकी अवैध संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है।









