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Liquor Revenue: सरकारी ठेकों पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी 24% से बढ़कर हुई 54%

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Liquor Revenue: नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग (Excise Department) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शराब पर टैक्स के जरिए रिकॉर्ड तोड़ बंपर कमाई की है। दिल्ली सरकार ने राजस्व संग्रहण (Revenue Collection) के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चालू तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की इसी समान अवधि के मुकाबले 17% की भारी वृद्धि दर्ज की है। आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राजस्व में आए इस जबरदस्त उछाल का सबसे बड़ा कारण दिल्ली की सरकारी दुकानों में इस साल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न प्रीमियम ब्रांडों की पर्याप्त उपलब्धता का होना है।

पिछले साल के 885 करोड़ के मुकाबले कमाए 1,038 करोड़ रुपये

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कारोबारी साल 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के भीतर दिल्ली सरकार को कुल 1,038 करोड़ रुपये का एक्साइज रेवेन्यू प्राप्त हुआ है। यदि इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष (2025-26) की इसी समान अवधि से की जाए, तो उस समय यह आंकड़ा 885 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस प्रकार चालू तिमाही में सरकार के खजाने में सीधे तौर पर 17% अधिक राशि आई है। इस वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने कुल एक्साइज रेवेन्यू का महत्वाकांक्षी लक्ष्य 7,200 करोड़ रुपये तय किया है, जबकि बीते वर्ष 2025-26 में लगभग 7,148 करोड़ रुपये का कुल रेवेन्यू कलेक्शन हुआ था।

सरकारी ठेकों पर विदेशी और राष्ट्रीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी 54% पहुंची

आबकारी विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि रजिस्टर्ड ब्रांड्स की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी से अब ग्राहकों को दुकानों पर मनपसंद शराब के कई बेहतर विकल्प मिल रहे हैं। इससे दिल्ली को पड़ोसी राज्यों के मुकाबले सालों से खोया हुआ अपना मार्केट शेयर वापस पाने में बड़ी मदद मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के सरकारी ठेकों पर अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रीमियम ब्रांड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 54% के उच्च स्तर तक पहुंच गई है, जो कि पिछले साल इसी अवधि में महज 24% तक ही सीमित थी।

पॉलिसी की अनिश्चितता खत्म होने और ‘मॉर्डन वॉक-इन स्टोर्स’ से बढ़ी कमाई

विगत वर्ष दिल्ली में आबकारी नीति (Excise Policy) को लागू करने को लेकर बनी प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण कंपनियों द्वारा ब्रांड्स के रजिस्ट्रेशन की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई थी। इसके चलते दिल्ली के बाजारों में चुनिंदा और पसंदीदा ब्रांड्स की भारी किल्लत हो गई थी और राजधानी के ग्राहक नोएडा (उत्तर प्रदेश) तथा गुरुग्राम (हरियाणा) के बाजारों का रुख करने लगे थे। वहां शराब के ज्यादा विकल्प और बेहतर कीमतें होने के चलते दिल्ली का राजस्व पड़ोसी राज्यों में शिफ्ट हो रहा था।

हालांकि, अब सरकार द्वारा वर्तमान आबकारी नीति को एक और साल के लिए बढ़ाने के फैसले से बाजार की अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके परिणामस्वरूप कंपनियों ने अपने ब्रांड्स के रजिस्ट्रेशन की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है। इसके साथ ही, दिल्ली की चारों प्रमुख सरकारी एजेंसियों (DSSIDC, DTTDC, DSCSC और DCCWS) ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में कई बड़े और अत्याधुनिक ‘मॉर्डन वॉक-इन स्टोर्स’ खोले हैं, जहां ग्राहकों को सभी प्रीमियम और इंटरनेशनल ब्रांड्स बेहद आसानी से मिल रहे हैं। यही वजह है कि दिल्ली सरकार का आबकारी घाटा अब भारी मुनाफे में बदल चुका है।

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VIKASH KHALKHO
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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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