Pawan Khera Bail Rejected : गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए जालसाजी के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गौहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामले की गहराई तक जाने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) आवश्यक है। न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने माना कि खेड़ा के उन ‘सहयोगियों’ का पता लगाना जरूरी है, जिन्होंने कथित तौर पर वे दस्तावेज जुटाए थे जिन्हें अब फर्जी बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल को हुई थी, जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशों में अघोषित संपत्ति अर्जित की है। इन आरोपों के खिलाफ रिनिकी भुइयां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज पूरी तरह जाली और कूटरचित (Forged) हैं। असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और आपराधिक साजिश सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि ये आरोप मुख्यमंत्री के खिलाफ होते, तो इसे ‘राजनीतिक बयानबाजी’ माना जा सकता था, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए एक ऐसी महिला को विवाद में घसीटा गया जो राजनीति में नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि खेड़ा अब तक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं या उन्होंने अमेरिका में निवेश किया है। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल की उस दलील में दम माना कि आरोपी पुलिस जांच से बच रहे हैं।
सहयोगियों की होगी तलाश: अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पवन खेड़ा ने खुद स्वीकार किया था कि उनके सहयोगियों ने ये दस्तावेज जुटाए हैं। ऐसे में यह पता लगाना अनिवार्य है कि वे सहयोगी कौन हैं और उन्होंने ये दस्तावेज कहां से और कैसे हासिल किए। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने खेड़ा का पक्ष रखते हुए इसे केवल मानहानि का मामला और राजनीतिक उत्पीड़न बताया था, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।











