नई दिल्ली : असम में मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत अब एक बड़े सवाल में बदल गई है। इस बाबत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि गर्ग की मौत हत्या थी और इसके जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति कानून की पकड़ से बच नहीं पाएगा। शुरू में सिंगापुर प्रशासन ने इस घटना को सामान्य हादसा बताया था और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया था। लेकिन असम सरकार ने अब इसे हत्या मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि गर्ग की मौत इस साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय हुई थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए असम सरकार ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है।
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर विधानसभा में चर्चा
आज यानी मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही उन लोगों को श्रद्धांजलि देने से शुरू हुई जिनका हाल ही में निधन हुआ है। विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया और स्वतंत्र विधायक अखिल गोगोई ने कार्यस्थगन प्रस्ताव की अनुमति मांगी, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हस्तक्षेप कर कहा कि सरकार इस मामले से पूरी तरह अवगत है और उन्होंने अध्यक्ष से प्रस्ताव को स्वीकार करने का अनुरोध किया।
CM शर्मा ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य चर्चा में नहीं बोलेंगे और केवल सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने सदस्यों से अनुरोध किया कि कोई भी टिप्पणी जुबिन गर्ग की मौत की जांच में बाधा न डाले।
जांच आयोग ने सबूत और बयान देने की अंतिम तिथि बढ़ाई
जुबिन गर्ग की मौत की जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग ने बयान दर्ज करने और साक्ष्य प्रस्तुत करने की तारीख 12 दिसंबर तक बढ़ा दी है। न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया की अध्यक्षता वाले आयोग ने 3 नवंबर से मामले की जांच शुरू की थी।
अधिकारियों के अनुसार, आयोग अब रविवार को छोड़कर सभी कार्यदिवसों में पूर्वाह्न 10.30 बजे से शाम 4 बजे तक इच्छुक व्यक्तियों को नोटरीकृत हलफनामे के माध्यम से बयान दर्ज करने की अनुमति दे रहा है। पहले अंतिम तिथि 21 नवंबर थी।
असम सरकार की कार्रवाई
इस बाबत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि जो भी इस हत्या में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य पुलिस का विशेष जांच दल (SIT) मामले की हर पहलू की जांच कर रहा है।
जुबिन गर्ग की मौत ने संगीत प्रेमियों और राज्य में लोगों में शोक की लहर फैला दी है। इस मामले में सरकार ने न्याय और पारदर्शिता का आश्वासन दिया है।













