Indian Railway Safety: नई दिल्ली। भारतीय रेल को देश की लाइफलाइन कहा जाता है, जिसमें रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। लोकल से लेकर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा के दौरान आपने अक्सर गौर किया होगा कि ट्रेन के सबसे आखिरी डिब्बे (कोच) के पीछे एक बड़ा सा पीले या सफेद रंग का ‘X’ का निशान बना होता है। दैनिक रूप से यात्रा करने वाले अधिकांश लोग इसे महज एक सामान्य डिजाइन या रेलवे का कोई लोगो समझकर छोड़ देते हैं। लेकिन सोमवार को रेलवे तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह कोई साधारण डिजाइन नहीं बल्कि पटरी पर दौड़ते हजारों पैसेंजर्स की जिंदगी से जुड़ा भारतीय रेलवे (Indian Railway) का एक बेहद जरूरी और अनिवार्य सुरक्षा नियम है।
इस ‘X’ के निशान का सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण काम रेलवे के मैदानी स्टाफ, जैसे स्टेशन मास्टर, पॉइंटमैन या ट्रैक मैन को यह आश्वस्त करना है कि पूरी की पूरी ट्रेन सुरक्षित रूप से स्टेशन या ब्लॉक सेक्शन से गुजर चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो, जब कोई ट्रेन किसी स्टेशन से गुजरती है, तो वहां तैनात रेलवे कर्मचारी अनिवार्य रूप से आखिरी डिब्बे के इस निशान को देखते हैं। अगर आखिरी डिब्बे पर ‘X’ का निशान साफ दिखाई दे जाता है, तो इसका तकनीकी मतलब यह होता है कि ट्रेन के सभी डिब्बे आपस में जुड़े हुए हैं और कोई भी कोच बीच रास्ते में पीछे छूटकर अलग नहीं हुआ है।
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सोचिए, यदि कोई ट्रेन किसी स्टेशन से गुजरती है और उसके अंतिम डिब्बे पर यह ‘X’ का निशान गायब मिलता है, तो रेलवे महकमे में तुरंत हड़कंप मच जाता है। इसका सीधा और साफ संकेत यह होता है कि ट्रेन के कुछ डिब्बे तकनीकी खराबी या कपलिंग टूटने के कारण बीच रास्ते में ही पटरी पर पीछे छूट गए हैं। ऐसी आपातकालीन स्थिति में रेलवे स्टाफ बिना एक सेकंड गंवाए फौरन वायरलेस पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ जारी कर देता है। इसके तुरंत बाद उस ट्रैक पर पीछे से आने वाली सभी दूसरी ट्रेनों को जहां की तहां रोक दिया जाता है, जिससे दो ट्रेनों के बीच होने वाली भीषण टक्कर और बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सके।
रेलवे सुरक्षा मानकों के अनुसार, इस ‘X’ के निशान को हमेशा चमकीले पीले या सफेद रेडियम पेंट से बनाया जाता है। रेडियम पेंट होने के कारण यह रात के घने अंधेरे, भारी मूसलाधार बारिश या सर्दियों के दौरान पड़ने वाले अत्यधिक कोहरे (धुंध) में भी दूर से साफ चमकता हुआ दिखाई देता है। इसके अलावा, रात के समय इस निशान के ठीक नीचे एक लाल रंग की लाइट लगातार ब्लिंक (जगमगाती) करती रहती है, जो पीछे से आ रही किसी अन्य ट्रेन के लोको पायलट को सतर्क रखने का काम करती है।
इस निशान की डबल तसल्ली के लिए इसके ठीक बगल में छोटे या बड़े अक्षरों में ‘LV’ भी बोर्ड पर लिखा होता है। रेलवे की सांकेतिक भाषा में ‘LV’ का फुल फॉर्म ‘Last Vehicle’ (आखिरी वाहन) होता है। यह लिखित कोड और ‘X’ का दृश्य निशान मिलकर रेल कर्मचारियों को शत-प्रतिशत यह भरोसा दिलाते हैं कि पटरी पूरी तरह से साफ है और ट्रेन अपने अंतिम छोर के साथ स्टेशन को पार कर चुकी है। अगली बार जब आप स्टेशन पर खड़े हों, तो भारतीय रेलवे के इस मूक रक्षक को देखना न भूलें।









