हुगली : पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से मिली एक हैवानियत भरी खबर के अनुसार यहां एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने प्रदेशभर में रोष फैला दिया है। तारकेश्वर रेलवे स्टेशन परिसर में हुई इस घटना ने एक बार फिर राज्य में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हाल के महीनों में प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ लगातार सामने आ रहे भयावह मामलों ने जनता और विपक्ष दोनों को चिंतित किया है।
मासूम का अपहरण, फिर नाले के पास मिली गंभीर हालत में
परिजनों के अनुसार, चार साल की बच्ची अपने माता-पिता के साथ मच्छरदानी में सो रही थी। तभी एक अज्ञात दरिंदा उसे उठा ले गया। सुबह बच्ची के गायब होने पर हड़कंप मच गया। देर तक खोजने के बाद बच्ची नाले के किनारे बेहद गंभीर हालत में मिली। उसके शरीर पर चोटों के निशान थे और वह बेहोश अवस्था में पाई गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है।
अस्पताल और पुलिस दोनों पर लापरवाही के आरोप
परिवार का कहना है कि बच्ची की हालत गंभीर थी, इसके बावजूद अस्पताल ने जल्दबाजी में उसे छुट्टी दे दी। वहीं पुलिस पर भी आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने पहुंचे परिजनों को शुरुआत में वापस भेज दिया गया। बाद में बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया और अब पुलिस आरोपी की तलाश में लगी है। स्टेशन परिसर और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
बंगाल में बढ़ते अपराधों पर विपक्ष का बड़ा हमला
यह घटना ऐसे समय आई है जब राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। बलात्कार, अपहरण और यौन उत्पीड़न के कई मामले हाल के महीनों में सुर्खियों में रहे हैं, जिसने राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रशासन अपराध रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में “महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं” और राज्य सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है। भाजपा नेताओं ने अस्पताल में जाकर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा किया।
जनता में भय, प्रशासन पर भरोसा घटा
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने आम जनता में भय पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत किए बिना और संवेदनशील मामलों की त्वरित जांच के बिना स्थितियाँ और बिगड़ सकती हैं।











