Traffic rules violated : सिंगरौली की सड़कों पर ‘हाइवा राज’ — नो-एंट्री में भी फर्राटा, ट्रैफिक पुलिस मौन!

VIKASH KHALKHO

Traffic rules violated :  सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। काग़ज़ों पर मौजूद सख्त ‘नो-एंट्री’ नियम के बावजूद सड़कों पर भारी वाहन, विशेषकर हाइवा और डंपर, धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। आरोप है कि यह सब कुछ यातायात प्रभारी की ‘मेहरबानी’ से चल रहा है, जिसने कानून को एक तमाशा बना दिया है।

Traffic rules violated : सड़कों पर चलता है ‘लेन-देन’ का काला खेल
जिले की सड़कों पर नो-एंट्री का कानून ‘जेब में बंद’ है। यह खेल इतना संगठित हो चुका है कि एक पूरी अनलिखी रेट लिस्ट तय हो गई है कि कौन सा वाहन कितने रुपये देकर छूटेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कें अब हाइवा की रेसिंग ट्रैक बन चुकी हैं। गनियारी से बैढ़न–बिलौंजी मार्ग जैसे नो-एंट्री ज़ोन में दिन-रात ट्रकों की गर्जना सुनाई देती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस सब जानती हुई भी आंखें बंद रखती है, क्योंकि यहाँ का कानून नोटों से झुक जाता है।

नो-एंट्री तोड़ने के बाद भी छोड़ा गया हाइवा
पिछले हफ्ते बिलौंजी मार्ग पर हुई एक घटना इस ‘कलेक्शन पॉइंट’ सिस्टम का जीता-जागता सबूत है। एक हाइवा को नो-एंट्री तोड़ते हुए पकड़ा गया, लेकिन आधे घंटे बाद वही हाइवा फिर सड़क पर दौड़ता नजर आया। सूत्रों के अनुसार, यह मामला ‘ले-देकर निपट गया’। यह लेन-देन ही है जो सड़क पर शुरू होता है और थाना में शांत हो जाता है, जिससे नियमों के उल्लंघन का संदेश दूर-दूर तक जाता है कि ‘रूल्स फॉर रिच, फाइन फॉर पूअर’।

Traffic rules violated :
मीडिया के सवालों पर यातायात थाना प्रभारी ने साधी चुप्पी
जब मीडिया ने इस पूरे प्रकरण पर यातायात थाना प्रभारी से प्रतिक्रिया मांगी, तो उनका रवैया ‘मौनव्रती’ जैसा रहा। उन्होंने न तो यह बताया कि हाइवा को बिना चालान क्यों छोड़ा गया, न ही नो-एंट्री में वाहनों के प्रवेश की अनुमति देने वाले पर कोई स्पष्टीकरण दिया। उनका यह गोलमोल रवैया ही सबसे बड़ा सबूत बन गया कि कहीं न कहीं यह पूरा सिस्टम ‘मैनेज’ है।

ओवरलोड वाहनों से जान जोखिम में, नागरिक परेशान
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दिन में शहर से गुजरते ये ओवरलोड वाहन केवल ट्रैफिक ही नहीं बिगाड़ते, बल्कि आम जनता का जीवन जोखिम में डालते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, बाइक सवार और दफ्तर जाने वाले लोग इन ट्रकों के बीच से निकलने को मजबूर हैं। कई बार हादसों में लोगों की जान चली गई और क‌ई अपाहिज हो ग‌ये। इन वाहनों से सड़कें टूट चुकी हैं और धूल का गुबार फैलता रहता है, जबकि पुलिस प्रशासन केवल “नियम लागू है” का बोर्ड लगाकर बैठा है।

निष्पक्ष जांच और CCTV लगाने की मांग
नागरिक संगठनों ने जिला प्रशासन और एसपी से यातायात थाना प्रभारी व संबंधित कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि नो-एंट्री के समय का सख्ती से पालन कराया जाए और हर मुख्य मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि रिश्वत और नियम तोड़ने का खेल कैमरे में कैद हो सके। जनता पूछ रही है कि जब कानून बिकने लगे, तो सुरक्षा की उम्मीद किससे करें? सवाल यह है कि जिला प्रशासन अब भी आंख मूंदे रहेगा या फिर कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार करेगा?

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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