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  • Income Tax India: टैक्स रिफंड से लेकर लोन अप्रूवल तक: जानें क्यों जरूरी है 31 जुलाई से पहले आईटीआर भरना

    Income Tax India: टैक्स रिफंड से लेकर लोन अप्रूवल तक: जानें क्यों जरूरी है 31 जुलाई से पहले आईटीआर भरना

    Income Tax India: नई दिल्ली। देश के भीतर वित्तीय अनुशासन और कर अनुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कर विशेषज्ञों ने करदाताओं को एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। आमतौर पर बहुत से करदाता हर साल आयकर रिटर्न यानी आईटीआर दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया को महज एक अनिवार्य वार्षिक सरकारी कार्य या औपचारिकता मानते हैं। लेकिन हकीकत में निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी ईमानदारी से अपना आईटीआर फाइल करना प्रत्येक नागरिक की एक बहुत बड़ी आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी होती है। तय समय पर रिटर्न दाखिल करने से आपको केवल कर से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में ही मदद नहीं मिलती, बल्कि इसके अलावा भी आपके निजी और व्यावसायिक जीवन में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। समय पर आईटीआर दाखिल करने से आपको अपना टैक्स रिफंड जल्दी हासिल करने में मदद मिलती है और यह आपके भविष्य के तमाम बड़े आर्थिक लेन-देन को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज साबित होता है।

    चूंकि चालू वित्तीय वर्ष के लिए इकतीस जुलाई की अंतिम समय सीमा बहुत तेजी से नजदीक आ रही है, ऐसे में करदाताओं को उन तीन सबसे खास कारणों को विस्तार से समझना चाहिए जो समय पर आईटीआर दाखिल करने को बेहद फायदेमंद बनाते हैं।

    लोन, बीमा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं में मिलती है बड़ी मदद

    आयकर रिटर्न दाखिल करने का सबसे पहला और व्यावहारिक लाभ यह है कि यह आधिकारिक दस्तावेज आपकी वास्तविक आय और आपकी आर्थिक स्थिरता के सबसे पुख्ता और प्रामाणिक सबूत के रूप में काम करता है। देश के तमाम बड़े सरकारी व निजी बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान अक्सर होम लोन, पर्सनल लोन या वाहन लोन के आवेदनों की समीक्षा करते समय ग्राहकों से पिछले दो या तीन वर्षों का वित्तीय आईटीआर दस्तावेज अनिवार्य रूप से मांगते हैं। इसके अलावा जब आप अपने परिवार की सुरक्षा के लिए कोई महंगी फिक्स्ड डिपॉजिट आधारित बीमा योजनाएं या बड़ा टर्म इंश्योरेंस खरीदने के लिए आवेदन करते हैं, तब भी इस दस्तावेज की सख्त जरूरत होती है। बीमा कंपनियां इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से आवेदक की वास्तविक सालाना आय और उसकी वित्तीय पात्रता का सटीक आकलन करने के लिए करती हैं। इसके अतिरिक्त विदेशों के लिए वीजा आवेदनों, बड़े सरकारी व निजी टेंडरों में भागीदारी करने और अन्य कॉर्पोरेट नियामक आवश्यकताओं के लिए भी आयकर विवरण की अक्सर मांग की जाती है।

    टीडीएस रिफंड का आसानी से दावा और मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड

    यदि किसी नौकरीपेशा कर्मचारी के मासिक वेतन, फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले वार्षिक ब्याज, संपत्ति से मिलने वाले किराये या किसी भी प्रकार की व्यावसायिक व पेशेवर कमाई के आधार पर वित्तीय नियमों के तहत तय सीमा से ज्यादा टैक्स कटौती यानी टीडीएस काट लिया गया है, तो उस अतिरिक्त कटी हुई राशि की वापसी का दावा करने के लिए समय पर आयकर विवरण दाखिल करना एकमात्र और बेहद जरूरी कानूनी जरिया है। करदाताओं को उनकी गाढ़ी कमाई का रिफंड वापस दिलाने में मदद करने के साथ-साथ आईटीआर आपके पते और आय के एक स्थायी कानूनी प्रमाण के रूप में भी हर जगह काम आता है। यह अलग-अलग प्रकार की कई जटिल आर्थिक और कानूनी प्रक्रियाओं को बहुत आसान और सुगम बना देता है। इसके नियमित उपयोग से वर्षों के दौरान आपके द्वारा कमाए गए धन और चुकाए गए टैक्स का एक बहुत ही शानदार और व्यवस्थित सरकारी रिकॉर्ड स्वतः ही बना रहता है जो भविष्य में संपत्ति की खरीद-बिक्री के समय बहुत मददगार साबित होता है।

    व्यावसायिक नुकसान को आगे ले जाने की सुविधा और नोटिस से सुरक्षा

    शेयर बाजार में नियमित निवेश करने वाले निवेशकों या अन्य किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े व्यापारियों को यदि किसी वित्तीय वर्ष में कोई बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है, तो वे समय पर आईटीआर दाखिल करके उस नुकसान को आगामी वर्षों के लिए आगे यानी कैरी फॉरवर्ड ले जा सकते हैं। इस तकनीकी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि भविष्य में जब भी उन्हें कोई बड़ा मुनाफा या आय होगी, तो वे उस पुरानी हानि को नए लाभ के मुकाबले संतुलित करके अपने कुल टैक्स के बोझ को काफी हद तक कम कर सकते हैं। हालांकि कर कानून के मुताबिक यह महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ आमतौर पर करदाताओं को तभी मिलता है जब वे अपना आयकर रिटर्न निर्धारित आधिकारिक समय सीमा के भीतर या उससे पहले पोर्टल पर दाखिल करते हैं। इसी विषय को लेकर तमाम टैक्स विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि समय पर और पूरी तरह से त्रुटिहीन आयकर रिटर्न दाखिल करने से कर विभाग के अधिकारियों द्वारा भेजे जाने वाले किसी भी अनपेक्षित नोटिस या जांच की संभावना बहुत कम हो जाती है।

  • आपके पास टैक्स बचाने का ‘लास्ट चांस’! 31 मार्च से पहले इन 5 ऑप्शन में तुरंत करें निवेश

    आपके पास टैक्स बचाने का ‘लास्ट चांस’! 31 मार्च से पहले इन 5 ऑप्शन में तुरंत करें निवेश

    निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : फाइनेंशियल ईयर 2025-26 खत्म होने में अब कुछ ही हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में कई लोगों को आखिरी समय पर याद आता है कि उन्हें टैक्स बचाने के लिए अभी निवेश करना है। अगर आपने अभी तक इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत निवेश नहीं किया है, तो मार्च का महीना आपके लिए आखिरी मौका हो सकता है।

    सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है, लेकिन इसके लिए निवेश 31 मार्च से पहले करना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि कुछ निवेश विकल्प ऐसे हैं जिन्हें आप ऑनलाइन और तुरंत कर सकते हैं।

    1. ELSS म्यूचुअल फंड

    इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) टैक्स बचाने के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। इसमें निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।

    इसका लॉक-इन पीरियड केवल 3 साल होता है, जो अन्य विकल्पों की तुलना में सबसे कम है। साथ ही इसमें ऑनलाइन निवेश कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना भी रहती है।

    2. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

    PPF एक सुरक्षित और लंबी अवधि का निवेश विकल्प है। इसमें सरकार द्वारा तय किया गया ब्याज मिलता है और यह निवेश भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट देता है।

    इसकी मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है और इसमें निवेश नेट बैंकिंग के जरिए आसानी से किया जा सकता है।

    3. टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट

    बैंकों में मिलने वाला टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने का अच्छा विकल्प है।

    इसमें कम से कम 5 साल का लॉक-इन होता है और बैंक फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट देते हैं। हालांकि इसमें मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है।

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    4. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

    NPS रिटायरमेंट के लिए बनाया गया एक निवेश विकल्प है। इसमें सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है।

    इसके अलावा सेक्शन 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी कुल मिलाकर आप 2 लाख रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं

    5. लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम

    अगर आपने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है, तो उसके प्रीमियम पर भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।

    टर्म प्लान या पारंपरिक इंश्योरेंस प्लान दोनों ही इसमें शामिल हैं और प्रीमियम का भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है।

    सबसे तेज टैक्स सेविंग विकल्प

    अगर आपके पास समय कम है और आप 31 मार्च से पहले टैक्स बचाना चाहते हैं, तो विशेषज्ञ आमतौर पर ELSS म्यूचुअल फंड को सबसे तेज और आसान विकल्प मानते हैं। इसमें ऑनलाइन निवेश कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है और इसका लॉक-इन पीरियड भी सबसे कम होता है।