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sukma News: सुकमा बना नक्सल मुक्त: दशकों की हिंसा के बाद शांति और विकास की नई शुरुआत

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निर्दोष आदिवासियों के बलिदान और न्याय की ऐतिहासिक विजय।

ऐतिहासिक घोषणा: 31 मार्च 2026 को जिला सुकमा ‘नक्सल मुक्त’ घोषित।

जिले का पहला नक्सल घटना 1989 में सुकमा क्षेत्र (अविभाजित बस्तर जिला) के ग्राम रामाराम में तत्कालीन सरपंच एवं विधायक के निवास पर बन्दूक की लूट।

1980 से अब तक माओवादी हिंसा में 398 निर्दोष नागरिकों की मृत्यु, लगभग 144 नागरिक गंभीर रूप से घायल।

नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों को मुखबिरी के संदेह में हत्या एवं प्रताड़ना की अनेक घटनाएँ।

पत्रकार, शिक्षादूत एवं आम नागरिकों को लक्षित कर हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम दिया गया।

नाबालिग बालक-बालिकाओं सहित निर्दोष नागरिकों को भी हिंसा का शिकार बनाया गया।

IED/बारूदी सुरंग विस्फोटों से आम नागरिकों को गंभीर क्षति पहुँचाई गई।

विकास कार्यों, सड़क निर्माण एवं शासकीय संपत्तियों को बाधित करने का प्रयास किया गया।

संकल्प की सिद्धि: 1980 के दशक से जारी आतंक का अंत, विकास की नई सुबह।

कृष्णा नायक सुकमा

sukma News: सुकमा :- जिला सुकमा एवं बस्तर क्षेत्र वर्ष 1980 के दशक से माओवादी हिंसा एवं आतंक से प्रभावित रहा है। दीर्घकालीन प्रयासों, सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, प्रशासनिक समन्वय तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से दिनांक 31 मार्च 2026 को जिला सुकमा को पूर्णतः नक्सल मुक्त घोषित किया गया है। यह उपलब्धि शांति, सुरक्षा एवं विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इस लंबे संघर्ष के दौरान सुरक्षा बलों के साथ-साथ निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों ने भी माओवादी हिंसा की बड़ी कीमत चुकाई है। 1980 से अब तक विभिन्न माओवादी घटनाओं में 398 निर्दोष नागरिकों की हत्या की गई तथा लगभग 144 नागरिकघायल हुए। इन हिंसक घटनाओं में पत्रकार , शासकीय कर्मचारी, शिक्षादूत, नाबालिक बालक बालिकाओ को माओवादियों द्वारा शिकार बनाया गया,ग्रामीणों को मुखबिरी के संदेह में प्रताड़ित करना, विकास कार्यों में बाधा डालना, सड़क निर्माण रोकना, शासकीय भवनों एवं स्कूलों को नुकसान पहुँचाना तथा भय का वातावरण निर्मित करना उनकी हिंसक एवं अमानवीय प्रवृत्ति को दर्शाता है।

विगत वर्षों में सुरक्षा बलों की निरंतर क्षेत्रीय उपस्थिति, प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान, जनसहभागिता तथा शासन की विकासपरक योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है। जिन क्षेत्रों में पूर्व में माओवादी गतिविधियाँ सक्रिय थीं, वहाँ वर्तमान में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। ग्रामीणों का विश्वास बढ़ा है, आवागमन सामान्य हुआ है तथा विकास की प्रक्रिया को गति मिली है।

आज जिन मार्गों पर पूर्व में बारूदी सुरंगों का खतरा बना रहता था, वहाँ अब आम नागरिकों का आवागमन निर्बाध रूप से हो रहा है। विद्यालयों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच सुलभ हुई है तथा शासन की योजनाएँ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही हैं। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों, प्रशासन एवं स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

⚫प्रमुख नक्सल हिंसा की घटनाएँ:-

13.02.1989 – (जिले का पहला नक्सल घटना) थाना सुकमा, रामाराम: नक्सलियों ने डकैती कर 12 बोर एवं 315 बोर बंदूक लूटी।

06.08.1990 – थाना कोंटा: 01 ग्रामीण की गोली मारकर हत्या।

09.05.1991 – थाना जगरगुंडा, भीमापुरम: 01 ग्रामीण की गोली मारकर हत्या।

25.08.1991 – थाना कोंटा, भेजी पटेलपारा: 01 ग्रामीण की गोली मारकर हत्या।

08.03.1993 – थाना भेजी, जग्गावरम: मडकम जोगा (52 वर्ष) की गोली मारकर हत्या।

18.12.1998 – थाना जगरगुंडा, पेदाबोड़केल: गंगाराम मुन्ना की धारदार हथियार से हत्या।

29.01.1999 – थाना किस्टाराम, एलमगुड़ा: सोडी पांडु को उठाकर गोली मारकर हत्या।

23.09.1999 – थाना भेजी, कोट्टाचेरू: कवासी भीमा की धारदार हथियार से हत्या।

05.11.2004 – थाना गोलापल्ली: बम विस्फोट व फायरिंग; 03 नागरिक मृत, 01 घायल।

01.06.2005 – थाना कोंटा, इंजरम: IED विस्फोट; 06 जवान शहीद, 03 नागरिक मृत, 01 घायल।

28.02.2006 – दरभागुड़ा (एर्राबोर): ट्रक IED से उड़ाया; 28 ग्रामीण मृत, 27 घायल।

07-08.03.2006 – दोरनापाल, देवरपल्ली: 04 ग्रामीणों की हत्या।

27-28.04.2006 – मनीकोन्टा (एर्राबोर): अपहरण कर हत्या; 15 नागरिक मृत।

12-13.05.2006 – कोंटा, इंजरम राहत शिविर: हमला; 04 ग्रामीण मृत, 05 घायल।

19.06.2006 – कोंटा, ढोढरा-चिखलगुड़ा: 07 ग्रामीणों की हत्या।

16-17.07.2006 – एर्राबोर राहत शिविर: बड़ा हमला; 33 नागरिक मृत, 18 घायल।

06.05.2009 – कोंटा, आसिरगुड़ा: IED विस्फोट; 02 CRPF शहीद, 05 SPO शहीद, 04 नागरिक मृत।

06.12.2009 – सुकमा, रामाराम गिरदालपारा: वाहन विस्फोट; 04 नागरिक मृत।

17.05.2010 – चिंगावरम (गादीरास): नागरिकों से भरी यात्री बस को IED से उड़ाया गया; 15 नागरिक मृत, 12 घायल, 16 जवान शहीद।

12-13.02.2013 – पत्रकार नेमीचंद जैन (दैनिक भास्कर/नई दुनिया/हरिभूमि) की नक्सलियों द्वारा गले पर तेज धारदार हथियार से वार कर हत्या।

15.01.2014 – नक्सलियों द्वारा पिस्टल से फायरिंग में मनेष कुमार नेताम (08 वर्ष), निवासी पटनमपारा सुकमा के पैर में गोली लगने से घायल।

21.02.2024, रात्रि 02:00 बजे – मड़कम पाकलू (45 वर्ष), निवासी जब्बागट्टा थाना चिंतलनार एवं माड़वी हिंगा (30 वर्ष), निवासी जब्बागट्टा थाना चिंतलनार को डण्डे से पीट-पीटकर एवं रस्सी से गला दबाकर हत्या।

26.05.2024, प्रातः लगभग 06:00 बजे – कुमारी मड़कम सुक्की (14 वर्ष), निवासी भीमापुरम जंगल में टोरा बीनते समय नक्सलियों द्वारा रखे बोरी में छिपाए गए बम के विस्फोट से दोनों पैरों में गंभीर चोट, अस्थायी अपंगता।

13.08.2024, रात्रि लगभग 10:00 बजे – सोयम शंकर (16 वर्ष), निवासी पुवर्ती डब्बापारा थाना जगरगुण्डा जिला सुकमा की नक्सलियों द्वारा गला घोंटकर हत्या।

27.08.2025 – शिक्षादूत लक्ष्मण बारसे (32 वर्ष), निवासी कोपनपारा सिलगेर जिला सुकमा की नक्सलियों द्वारा लाठी-डंडा एवं टंगिया से मारकर हत्या।

जिला सुकमा में स्थापित यह शांति उन सभी निर्दोष ग्रामीणों एवं अमर शहीदों को समर्पित है, जिनके सर्वोच्च बलिदान से आज क्षेत्र में सुरक्षा एवं विकास का वातावरण निर्मित हुआ है। जिला पुलिस सुकमा क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं विकास को बनाए रखने हेतु प्रतिबद्ध है।

जिला पुलिस सुकमा
“शांति, सुरक्षा एवं विकास की नई पहचान – हमारा सुकमा”

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