CEC Gyanesh Kumar Removal Process: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। विपक्ष की ओर से उनके कामकाज पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें पद से हटाने की मांग भी सामने आई है। आरोपों के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार या संसद सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटा सकती है? इसका जवाब भारतीय संविधान में तय विशेष प्रक्रिया में छिपा है।मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC का पद संवैधानिक है। उन्हें पद से हटाने के लिए सामान्य सरकारी अधिकारियों की तरह कोई प्रशासनिक आदेश जारी नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
CEC को हटाने के लिए संविधान में क्या है व्यवस्था?
भारत के चुनाव आयोग की जिम्मेदारी लोकसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन और निगरानी से जुड़ी है। चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के मामले में विशेष संवैधानिक सुरक्षा दी गई है।संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जिनके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका मतलब है कि केवल सरकार की इच्छा या किसी राजनीतिक दल की मांग के आधार पर CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता।
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किन आधारों पर हटाए जा सकते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए वही संवैधानिक आधार लागू होते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के मामले में लागू होते हैं। इनमें साबित कदाचार और अक्षमता शामिल हैं।हालांकि, किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में पद से हटाने के लिए पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और दोनों सदनों में आवश्यक विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है।
संसद से शुरू होती है हटाने की प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया संसद से शुरू होती है। इसके लिए लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्ताव लाया जा सकता है। प्रस्ताव पर विचार करने और आगे की कार्रवाई के लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।प्रस्ताव को दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित करना आवश्यक है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक सदन में प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित होकर मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है।यह प्रक्रिया सामान्य विधेयक पारित करने से अलग और अधिक कठिन है।
राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही हट सकता है पद से
अगर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में आवश्यक बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है।इस तरह CEC को हटाने की प्रक्रिया में संसद के दोनों सदनों और राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका होती है। केवल केंद्र सरकार का फैसला या संसद के किसी एक सदन में प्रस्ताव पारित होना पर्याप्त नहीं है।
CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों में क्या है अंतर?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की प्रक्रिया में अंतर है।संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा दी गई है। वहीं, अन्य चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता।इसका मतलब है कि अन्य चुनाव आयुक्तों के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश महत्वपूर्ण होती है, जबकि CEC को हटाने के लिए संसद की विशेष प्रक्रिया जरूरी है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के बीच क्या समझना जरूरी है?ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवाल और उन्हें हटाने की मांग राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा हैं। लेकिन किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।इसलिए ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना किसी सामान्य प्रशासनिक फैसले की तरह नहीं है। इसके लिए निर्धारित आधार, संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत और राष्ट्रपति के आदेश की जरूरत होती है।







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