Pitru Paksha: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धरती पर सबसे पहले श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति महर्षि निमि थे। कहा जाता है कि उनके द्वारा किए गए इस अनुष्ठान के बाद दूसरे ऋषियों ने भी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण की परंपरा को अपनाया।
महाभारत के अनुशासन पर्व में भी श्राद्ध कर्म के महत्व और महर्षि निमि से जुड़ी कथा का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, कुरुक्षेत्र में बाणों की शैय्या पर लेटे पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर को श्राद्ध की महत्ता समझाते हुए इस प्रसंग का वर्णन किया था।
क्या है महर्षि निमि और उनके पुत्र की कहानी?
कथा के अनुसार, महर्षि निमि के पुत्र की असमय मृत्यु हो गई थी। पुत्र की मृत्यु से वे बेहद दुखी हो गए। अपने पुत्र की आत्मा की शांति के उद्देश्य से उन्होंने तर्पण और अन्न दान से जुड़ा अनुष्ठान किया। अनुष्ठान पूरा होने के बाद महर्षि निमि के मन में एक सवाल उठा। उन्होंने सोचा कि जब पहले किसी ऋषि-मुनि ने इस तरह का कर्म नहीं किया था, तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया? इसी विचार के साथ उन्होंने अपने पिता महर्षि अत्रि का स्मरण किया।
मान्यता है कि महर्षि अत्रि उनके सामने प्रकट हुए और पुत्र वियोग से दुखी निमि को सांत्वना दी। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र को पितरों के लिए किए जाने वाले तर्पण और श्राद्ध कर्म की विधि और उसके महत्व के बारे में बताया। पिता से पूरी विधि जानने के बाद महर्षि निमि ने निर्धारित विधि-विधान के अनुसार अपने पुत्र के लिए श्राद्ध और तर्पण किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, उनके इस कर्म को देवताओं और पितरों ने स्वीकार किया।
जब दूसरे ऋषियों को इस अनुष्ठान और उसके महत्व की जानकारी मिली, तो उन्होंने भी पितरों के सम्मान और तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म को अपनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह परंपरा आगे बढ़ी और पितरों को समर्पित विशेष अवसर के रूप में इसकी मान्यता स्थापित हुई।
युधिष्ठिर से जुड़ी श्राद्ध की परंपरा
महाभारत काल में युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर द्वारा युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और पिंडदान किए जाने की कथा भी प्रचलित है।
इस तरह पितृ पक्ष केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति स्मरण, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने से जुड़ा अवसर माना जाता है। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में इससे जुड़े प्रसंगों का वर्णन मिलता है, जिनके आधार पर आज भी लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते






