हाईकोर्ट का कड़ा आदेश : भोपाल के कलियासोत डैम किनारे पूर्व IAS और कारोबारियों के अवैध बंगलों पर चलेगा बुलडोजर!

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हाईकोर्ट का कड़ा आदेश
हाईकोर्ट का कड़ा आदेश

भोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील कलियासोत बांध क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने ‘व्हिस्परिंग पाम्स’ सोसाइटी में नियमों से अधिक निर्माण करने वाले पूर्व IAS अधिकारियों और बड़े कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने संबंधित विभागों और बिल्डर को नोटिस जारी कर दिया है, जिससे इन बंगलों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी का संकेत मिल रहा है।

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लो डेंसिटी ज़ोन में 50% से अधिक अवैध निर्माण

भोपाल मास्टर प्लान 2005 के अनुसार, कलियासोत बांध के पास का यह क्षेत्र ‘लो डेंसिटी ज़ोन’ यानी कम घनत्व वाला क्षेत्र घोषित है। यहाँ निर्माण के सख्त नियम लागू हैं, जिसके तहत 10,000 वर्गफुट के प्लॉट पर केवल 600 वर्गफुट (6%) तक ही निर्माण की अनुमति थी।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं महेश सिंह परमार और राज बहादुर प्रसाद की ओर से पेश हुए वकील राहुल दिवाकर और हर्षवर्धन तिवारी ने कोर्ट को बताया कि इस पॉश सोसाइटी में 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया है। आरोप है कि पूर्व मुख्य सचिवों समेत कई प्रभावशाली लोगों ने नियमों की अनदेखी करते हुए आलीशान कोठियाँ खड़ी कर दी हैं।

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मास्टर प्लान उल्लंघन और पर्यावरणीय संवेदनशीलता

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि यह क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील है, बल्कि यहाँ हुए अत्यधिक निर्माण से मास्टर प्लान का उल्लंघन हुआ है और जलस्रोतों तथा हरित क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि ये तथ्य सही पाए गए, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा।

अदालत ने इन हाई-प्रोफाइल लोगों से माँगा जवाब

हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कई विभागों और व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया है। इनमें शामिल हैं:

  • दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी
  • एक उद्योगपति
  • नगर निगम आयुक्त
  • शहरी प्रशासन आयुक्त
  • टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डायरेक्टर
  • सोसाइटी के बिल्डर

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि स्वीकृत सीमा से अधिक बने मकानों को अवैध घोषित कर ध्वस्त किया जाए और भविष्य में इस क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण पर रोक लगाई जाए।

अब सबकी निगाहें 24 नवंबर को होने वाली मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अगर कोर्ट में आरोप सही साबित होते हैं, तो भोपाल की इस पॉश सोसाइटी के कई प्रभावशाली बंगलों पर बड़ा विध्वंस हो सकता है।

 

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