Someshwar Hospital Gariyaband : गरियाबंद (09 फरवरी 2026): जिला मुख्यालय स्थित सोमेश्वर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान ऑक्सीजन की कमी और अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही से एक मरीज की मौत का मामला गरमा गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इस प्रकरण की सूक्ष्म जांच के लिए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जिसे महज 36 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है।
बिना वैध लाइसेंस के चल रहा था इलाज
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सोमेश्वर हॉस्पिटल के पास अस्थि रोग (Orthopedic) विभाग के संचालन और इलाज का वैध लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल ने पसली टूटी हुई हालत में मरीज को भर्ती किया और उसका उपचार शुरू कर दिया। सीएमएचओ ने इसे नर्सिंग होम एक्ट का गंभीर उल्लंघन करार दिया है।
एंबुलेंस में नहीं मिली संजीवनी
अस्पताल में स्थिति बिगड़ने के बाद जब मरीज को उच्च केंद्र के लिए रेफर किया गया, तो अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस में ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। रास्ते भर मरीज सांसों के लिए संघर्ष करता रहा और अंततः ऑक्सीजन के अभाव में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर सही इलाज और एंबुलेंस में ऑक्सीजन मिलती, तो जान बचाई जा सकती थी।
विशेषज्ञों की टीम करेगी पड़ताल
सीएमएचओ द्वारा गठित जांच समिति में सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. हरीश चौहान, निश्चेतन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र कुमार पात्रे, डॉ. गजेंद्र ध्रुव और डॉ. सुनील रेड्डी को शामिल किया गया है। यह टीम अस्पताल के दस्तावेजों, उपलब्ध सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की गहन जांच करेगी।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाता है, तो नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी निजी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा।











