EMI Tips: EMI के बढ़ते बोझ से हैं परेशान? जानें कर्ज के जाल से जल्दी बाहर निकलने के स्मार्ट तरीके

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EMI Tips: रायपुर। आधुनिक जीवनशैली और बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के चलते आजकल कार, मकान, मोबाइल या पर्सनल जरूरतों के लिए लोन मिलना बेहद आसान हो गया है। लेकिन बिना सोचे-समझे या बिना सही वित्तीय समझ के लिया गया कर्ज कई बार आम आदमी के लिए गले की फांस बन जाता है। लोन की मासिक किस्त, जिसे हम सामान्य भाषा में EMI (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट) कहते हैं, कई परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ देती है। अक्सर लोग कम मासिक किस्त के लालच में आकर बहुत लंबा टेन्योर (लोन की अवधि) चुन लेते हैं, जिससे उन्हें बैंक को मूलधन से कहीं ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है। आज ‘आपका पैसा’ विशेष कॉलम में हम इसी EMI के गणित को समझेंगे और जानेंगे कि कैसे कुछ आसान व स्मार्ट वित्तीय फैसले लेकर आप अपने कर्ज को समय से पहले खत्म कर मानसिक शांति पा सकते हैं।

क्या है EMI का मूल गणित और यह कैसे तय होती है?

वित्तीय जानकारों के अनुसार, EMI वह निश्चित राशि है जो कर्जदार को हर महीने एक तय तारीख पर बैंक या वित्तीय संस्थान को लौटानी होती है। इस एक किस्त में दो मुख्य घटक शामिल होते हैं—पहला ‘मूलधन’ (जो राशि आपने उधार ली है) और दूसरा ‘ब्याज’ (उस उधार पर बैंक द्वारा लगाया गया शुल्क)। आपकी मासिक किस्त मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करती है: कुल लोन अमाउंट, ब्याज की दर (इंटरेस्ट रेट) और लोन चुकाने की समय सीमा (टेन्योर)। यहाँ सीधा नियम काम करता है—यदि आप लोन चुकाने की अवधि लंबी रखेंगे तो आपकी मासिक किस्त तो कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, छोटी अवधि चुनने पर मासिक किस्त भले ही ज्यादा होगी, परंतु आप बहुत कम ब्याज देकर जल्दी कर्जमुक्त हो जाएंगे।5,572 Emi Royalty-Free Images, Stock Photos & Pictures | Shutterstock

EMI से जुड़ी ये आम गलतियां खाली कर देती हैं जेब

आमतौर पर लोग लोन लेते समय या उसकी किस्तें भरते समय कई बड़ी गलतियां करते हैं। सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग अपनी मासिक आय का 50% से अधिक हिस्सा केवल EMI भरने में लगा देते हैं, जिससे घरेलू बजट चरमरा जाता है। इसके अलावा, हर छोटी-बड़ी चीज जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, छुट्टियां और कपड़े तक को बिना सोचे-समझे नो-कॉस्ट EMI पर खरीदने की लत भी लोगों को कर्ज के जाल में धकेल देती है। लोग लोन एग्रीमेंट की शर्तों और हिडन चार्जेस को ध्यान से नहीं पढ़ते और न ही अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करते हैं, जिससे वे महंगा कर्ज ले बैठते हैं।₹1 Crore Home Loan EMI Calculation with Tips to Save More - Olyv

किस्त ज्यादा या कम रखने के अपने-अपने फायदे और नुकसान

यदि आप अपने लोन की EMI ज्यादा रखते हैं, तो इसके बड़े फायदे हैं। इससे आपका लोन बेहद कम समय में खत्म हो जाता है और आपको बैंक को कुल ब्याज बहुत कम देना पड़ता है, जिससे अंततः आपका क्रेडिट स्कोर भी सुधरता है। हालांकि, इसका नुकसान यह है कि यह आपके मासिक कैश फ्लो को टाइट कर देता है, जिससे आपातकालीन स्थितियों के लिए बचत करना मुश्किल हो जाता है। दूसरी ओर, कम EMI रखने से आपके हाथ में हर महीने खर्च और निवेश के लिए पर्याप्त पैसा (फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी) तो बचता है, लेकिन इसके एवज में लोन बरसों-बरस चलता रहता है और संपत्ति पर आपका पूर्ण मालिकाना हक बहुत देर से मिल पाता है।Calculate Home Loan EMI for Rs. 1 Crore

बैलेंस ट्रांसफर और प्री-पेमेंट हैं कर्ज मुक्ति के अचूक हथियार

अगर आप अपने लोन को जल्दी खत्म करना चाहते हैं, तो ‘लोन प्री-पेमेंट’ सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसका सीधा मतलब है कि नियमित किस्त के अलावा जब भी आपके पास बोनस, इंक्रीमेंट या किसी अन्य स्रोत से अतिरिक्त पैसा आए, तो उसे लोन अकाउंट में आंशिक भुगतान के रूप में जमा कर दें। इससे सीधे आपके मूलधन में कटौती होती है और ब्याज का मीटर धीमा हो जाता है। दूसरा तरीका है ‘बैलेंस ट्रांसफर’ का उपयोग करना; यदि कोई दूसरा बैंक आपके वर्तमान बैंक की तुलना में काफी कम ब्याज दर पर लोन दे रहा है, तो आप अपने बकाया लोन को वहां ट्रांसफर करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लोन लेते समय शुरुआत में ही ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट करने से लोन की मुख्य राशि कम हो जाती है, जिससे भविष्य का बोझ अपने आप घट जाता है।Home Loan EMI Payment Saving Tips

एक से अधिक लोन होने पर अपनाएं यह स्ट्रैटेजी

यदि आपके ऊपर एक से अधिक लोन चल रहे हैं, तो वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि सबसे पहले उस लोन को बंद करने का प्रयास करें जिसकी ब्याज दर सबसे अधिक है, जैसे क्रेडिट कार्ड का बकाया या पर्सनल लोन। इसे ‘डेब्ट अवलांच’ तरीका कहा जाता है। लोन को समय से पहले या समय पर चुकाने से आपकी क्रेडिट प्रोफाइल बेहद मजबूत होती है और वित्तीय बाजार में आपकी साख बढ़ती है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हमेशा आंख मूंदकर लोन जल्दी चुकाना ही सही रणनीति नहीं होती। यदि आपके लोन की ब्याज दर बहुत कम है (जैसे होम लोन) और आपको उस पैसे को कहीं और निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न मिल रहा है, या फिर आपके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड नहीं है, तो सारा पैसा लोन चुकाने में लगाने के बजाय उसे बचाकर रखना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होता है।

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