Singrauli News: सिंगरौली की व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर गईं प्रभारी मंत्री..? आखिर सिंगरौली कब जुड़ेगा सही मायनों में देश से

Sanjay Sahu
Singrauli News

Singrauli News: सिंगरौली देश की ऊर्जाधानी कहे जाने वाले सिंगरौली की स्थिति एक बार फिर सुर्खियों में है — इस बार वजह बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि यात्रा और व्यवस्था की ‘बेबस कहानी’ है। ज़िले की प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके का हालिया सिंगरौली दौरा जिले की जमीनी हकीकत को उजागर कर गया। प्रभारी मंत्री का सिंगरौली आगमन किसी सहज यात्रा से कम नहीं, बल्कि संघर्ष भरी कहानी बन गया। पहले एयर टैक्सी से पहुंचने की योजना बनी, परंतु उड़ान रद्द हो गई। इसके बाद विकल्प चुना गया वंदे भारत एक्सप्रेस — देश की शान कही जाने वाली ट्रेन, लेकिन वह भी छूट गई। अंततः मंत्रीजी को अगले दिन सामान्य ट्रेन से सिंगरौली पहुंचना पड़ा।

 

 

Singrauli News: स्वयं मंत्री ने स्वीकार किया कि “सिंगरौली पहुंचने में जितनी कठिनाई हुई, उतनी किसी पहाड़ी क्षेत्र में भी नहीं होती।” यह बयान ही अपने आप में प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है — जब जिले की प्रभारी मंत्री ही यहां तक पहुंचने में संघर्ष कर रही हैं, तो आम नागरिक, मरीज, छात्र या व्यापारी किस हाल में होंगे? क्या विकास सिर्फ़ भाषणों और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रह गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही कहती हैं सिंगरौली देश को रोशनी देता है, पर खुद विकास को छोड़ कर अंधेरी सुरंग में फंसा हुआ है।

 

Singrauli News: सड़कों की हालत बदहाल, रेल सेवाएं अव्यवस्थित, एयर कनेक्टिविटी अधूरी, और बस सेवाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। सवाल यह उठता है कि जब सिंगरौली जैसा औद्योगिक जिला देश की अर्थव्यवस्था में इतनी अहम भूमिका निभाता है, तो यहां की बुनियादी व्यवस्थाएं इतनी लचर क्यों हैं? अब निगाहें मंत्री सम्पतिया उइके पर हैं — क्या वे अपने इस अनुभव को एक ‘संदेश’ मानकर सिंगरौली की परिवहन व्यवस्था सुधारने के ठोस कदम उठाएंगी, या यह यात्रा भी बाकी फाइलों की तरह ‘क्लोज़’ कर दी जाएगी?

 

Singrauli News: सवालों की बौछार में घिरीं मंत्री, जवाबों की छतरी नहीं खुली…

 

Singrauli News: सिंगरौली पहुंचने के बाद मंत्री उइके ने समीक्षा बैठक की, लेकिन जैसे ही मीडिया ने तीखे सवाल दागे, मंत्रीजी के जवाबों की डोर ढीली पड़ गई। डीएमएफ फंड, नगर निगम, पीएचई, ट्रामा सेंटर, मॉडल रोड से लेकर कंपनियों की मनमानी तक — हर सवाल पर या तो मौन रही या टालमटोल कीई…

पत्रकारों ने जब पूछा कि “डीएमएफ फंड से महिला एवं बाल विकास विभाग में हुए चम्मच-जग घोटाले की जांच कहां तक पहुंची?” तो मंत्रीजी ने मुस्कुरा कर चुप्पी साध ली। कोई जवाब नहीं — न सफाई, न स्थिति स्पष्ट।

ट्रामा सेंटर की दुर्दशा पर जब सवाल हुआ — “मरीजों को दवा नहीं, डॉक्टर नहीं, बेड नहीं — आखिर जिम्मेदार कौन?” — तो मंत्रीजी का जवाब था, “स्थिति सुधारने के प्रयास जारी हैं।” लेकिन सवाल यह है कि कब तक जारी रहेंगे? जनता अब ‘प्रयास जारी हैं’ नहीं, ‘परिणाम चाहिए’ मांग रही है।

मॉडल रोड या मॉडल मज़ाक…?

माजन मोड़ से विंध्यनगर तक बनने वाली करोड़ों की लागत वाली मॉडल रोड आज गड्ढों में समा चुकी है। मंत्रीजी से जब गुणवत्ता पर सवाल पूछा गया, तो जवाब मिला — “कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।”जनता का सवाल है — आखिर कब तक “जांच कराई जाएगी” का राग अलापा जाएगा? कब कार्रवाई होगी?

नगर निगम के घटिया निर्माण, फर्जी भुगतान और भ्रष्टाचार पर भी मंत्रीजी का जवाब वही पुराना — “समीक्षा चल रही है।” जबकि सच्चाई यह है कि समीक्षा की फाइलें वर्षों से चक्कर काट रही हैं, और भ्रष्टाचार कुर्सी पर बैठा आराम से चाय की चुस्की ले रहा है।

पीएचई और वीरान प्लाज़ा पर गोलमोल जवाब….

पीएचई विभाग में अधूरे हैंडपंप और प्लाज़ा के अधूरे निर्माण पर मंत्रीजी के जवाब अस्पष्ट रहे।
मीडिया के सवालों पर मंत्रीजी ने सिर्फ इतना कहा — “मैं देखवाऊंगी।”पर जनता का सवाल अब साफ है — कब तक देखवाया जाएगा, आखिर कब सुधरवाया जाएगा?

कंपनियों की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी…

पत्रकारों ने यह मुद्दा भी उठाया कि मजदूरों के आवेदन महीनों तक लंबित रहते हैं, जबकि कंपनियों के आवेदन पर तत्काल कार्रवाई हो जाती है। इस दोहरे रवैये पर मंत्रीजी ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।
शायद उन्हें भी पता है कि सिंगरौली में कंपनियां सिर्फ़ कोयला नहीं, नीतियां भी ‘खनन’ करती हैं।

Singrauli News: मंत्री जी का मौन रहना जो बहुत कुछ कह गया…

Singrauli News: सिंगरौली दौरे में प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके के “मौन” ने बहुत कुछ कह दिया —चुप्पी ने यह जता दिया कि या तो जानकारी का अभाव है, या इच्छाशक्ति की कमी।डीएमएफ फंड से लेकर ट्रामा सेंटर, मॉडल रोड से लेकर नगर निगम तक — हर मुद्दे पर सिंगरौली एक बार फिर अपने ‘अव्यवस्थित विकास’ की कहानी दोहरा रहा है। अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि मंत्रीजी को कठिनाई क्यों हुई, बल्कि यह है कि क्या उनके इस अनुभव से सिंगरौली की जनता को राहत मिलेगी? या फिर यह यात्रा भी सिस्टम की दीवारों में दबी एक और ‘रिपोर्ट’ बनकर रह जाएगी?

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