Excise Scam: नवानगर में नियमों की धज्जियाँ: शराब दुकानों पर ओवररेटिंग और देर रात तक बिक्री से जनता परेशान

Excise Scam: सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के नवानगर क्षेत्र से आबकारी नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही शराब दुकानों का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं ने नवानगर की शराब दुकानों की कार्यप्रणाली और उनके संचालकों पर गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शिकायतों के अनुसार, इन दुकानों पर न केवल निर्धारित समय-सीमा के बाद भी देर रात तक अवैध रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, बल्कि हर ब्रांड पर उपभोक्ताओं से मनमानी कीमत वसूली जा रही है। बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जिला आबकारी विभाग द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न किए जाने से स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर भी उंगलियाँ उठने लगी हैं।

एमआरपी से 50 से 80 रुपये अतिरिक्त वसूली, बिल देने से साफ इनकार

नवानगर और आसपास के रहवासियों का आरोप है कि रात के सन्नाटे में इन दुकानों की शटर आधी गिराकर या पिछले दरवाजे से धड़ल्ले से शराब और बीयर की सप्लाई की जाती है। इस अवैध अवधि के दौरान सेल्समैनों द्वारा प्रति बोतल निर्धारित प्रिंट रेट (MRP) से ₹50 से लेकर ₹80 तक की अवैध अतिरिक्त वसूली (ओवररेटिंग) की जाती है। नियमों के मुताबिक हर लाइसेंसी दुकान पर स्टॉक और मूल्य की आधिकारिक ‘रेट लिस्ट’ (दर सूची) को मुख्य दीवार पर चस्पा करना अनिवार्य है, लेकिन नवानगर की अधिकांश दुकानों से यह सूचियां नदारद हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले ‘कस्टमर बिल’ मांगने पर ग्राहकों को डराया-धमकाया जाता है और बिल देने से साफ मना कर दिया जाता है।

सीमा पार उत्तर प्रदेश की पारदर्शी व्यवस्था का दिया हवाला

सिंगरौली के सीमावर्ती अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों ने मप्र आबकारी व्यवस्था की तुलना पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से करते हुए गहरा असंतोष व्यक्त किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंगरौली से महज कुछ ही दूरी पर स्थित उत्तर प्रदेश के सोनभद्र/शक्तिनगर क्षेत्र की शराब दुकानों में बकायदा डिजिटल और प्रिंटेड दर सूची मुख्य बोर्ड पर प्रदर्शित रहती है। वहां उत्तर प्रदेश शासन के कड़े नियमों के कारण दुकानें निर्धारित सेकंड पर खुलती और तय समय पर बंद हो जाती हैं, जहां ओवररेटिंग की कोई गुंजाइश नहीं होती। इसके विपरीत, सिंगरौली जिले में आबकारी अमले के कथित संरक्षण के चलते नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।

काउंटर पर लगातार बढ़ रहे विवाद, कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा

दर सूची न होने और अत्यधिक पैसे वसूले जाने के कारण आए दिन नवानगर की दुकानों के सामने ग्राहकों और शराब ठेकेदारों के लठैत कर्मचारियों के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज आम बात हो चुकी है। हाल ही में कुछ उपभोक्ताओं के साथ सेल्समैनों द्वारा मारपीट और अभद्र व्यवहार किए जाने की घटनाएं भी प्रकाश में आई हैं। प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यदि आबकारी और स्थानीय थाना पुलिस ने समय रहते इन बेलगाम ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो ओवररेटिंग के ये विवाद भविष्य में किसी बड़े खूनी संघर्ष या कानून-व्यवस्था (Law and Order) के संकट में तब्दील हो सकते हैं। क्षेत्र की जनता ने कलेक्टर से इस पूरे सिंडिकेट पर तत्काल छापेमारी कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।

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