Jabalpur Protest: जबलपुर। मध्य प्रदेश में कथित जमीन घोटाले के आरोपों को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी कड़ी में जबलपुर के कांचघर चौक पर युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पुतला दहन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई और पूरे इलाके में राजनीतिक तनाव का माहौल बन गया।
Jabalpur Protest: यह प्रदर्शन युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया के निर्देश पर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दौरान उज्जैन जिले में एक बड़े जमीन घोटाले से जुड़े मामले सामने आए हैं, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के शामिल होने का भी दावा किया जा रहा है।
जमीन बढ़ने के दावों पर उठाए सवाल
Jabalpur Protest: प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि वर्ष 2023 से पहले मुख्यमंत्री के पास लगभग 62 एकड़ जमीन थी, जो वर्ष 2023 से 2025 के बीच बढ़कर करीब 168 एकड़ हो गई है। कार्यकर्ताओं ने इस कथित बढ़ोतरी को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह मामला केवल संपत्ति वृद्धि का नहीं, बल्कि एक बड़े जमीन लेन-देन और घोटाले से जुड़ा हो सकता है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
एडवोकेट रोहित वंश ने की निष्पक्ष जांच की मांग
Jabalpur Protest: प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट रोहित वंश ने प्रशासन से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुई संपत्ति वृद्धि किस प्रकार और किन परिस्थितियों में हुई है।उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मामले की जांच नहीं होती है तो यह लोकतंत्र और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
युवक कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन तेज
Jabalpur Protest: कांचघर चौक पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। इस दौरान कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
राजनीतिक माहौल गर्माया
Jabalpur Protest: इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर हैं, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में है, और सभी की नजर अब प्रशासनिक जांच या सरकारी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।







