Singrauli Crusher Scam : सिंगरौली। जिले में संचालित स्टोन क्रशर प्लांट संचालकों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुके हैं, लेकिन आम जनता के लिए ये जानलेवा साबित हो रहे हैं। मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाते इन क्रशरों पर खनिज विभाग की चुप्पी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर घनी आबादी और मुख्य मार्गों के पास क्रशर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय क्षति और दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
सरकारी नियमों के मुताबिक, क्रशर प्लांट को आबादी से एक निश्चित दूरी पर होना चाहिए और धूल नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम के साथ-साथ खदानों के चारों ओर सुरक्षा घेराबंदी (बाउंड्री) अनिवार्य है। हालांकि, सिंगरौली के अधिकांश क्रशर खदानों में ये व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। सैकड़ों मीटर गहरी हो चुकी खदानों को खुला छोड़ दिया गया है, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। प्रदूषण की मार झेल रहे इस जिले में क्रशरों से उड़ने वाली धूल मजदूरों और आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ-साथ कृषि भूमि को भी बर्बाद कर रही है।
हैरानी की बात यह है कि स्थानीय निवासियों और मीडिया द्वारा बार-बार मुद्दा उठाए जाने के बाद भी खनिज विभाग ‘सुप्त अवस्था’ में नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी को लेकर चर्चा है कि “रुपयों की खनक” के आगे नियमों की आवाज दब गई है। क्रिटिकल प्रदूषण जोन में शामिल सिंगरौली में पटाखों पर तो पाबंदी लगाई जाती है, लेकिन प्रदूषण फैलाने वाले इन बड़े स्रोतों पर कार्रवाई शून्य है।
सुरक्षा मानकों की इस अनदेखी की भारी कीमत यहाँ की गरीब जनता चुका रही है। यदि समय रहते इन अवैध और नियम विरुद्ध संचालित क्रशरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘माफिया राज’ पर कब लगाम लगाता है।













