राजेश व्यास/उज्जैन। माता की आराधना का पर्व नवरात्रि देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। शारदीय नवरात्रि के आरंभ होते ही उज्जैन स्थित माता हरसिद्धि मंदिर में भक्तों का ताँता लगना शुरू हो गया है। यह मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
माता हरसिद्धि को सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी माना जाता है और विक्रम संवत की शुरुआत यहीं से होती है। शास्त्रों में उल्लेखित कथा के अनुसार, इसी स्थान पर सती माता की कोहनी गिरी थी, जिससे यह जगह शक्ति की आराधना का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई।
भव्य नवरात्रि आयोजन:
नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में विशेष पूजा-पाठ, आराधना और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। पंडित राजू गोस्वामी के अनुसार, माता हरसिद्धि की दिव्य प्रतिमा का नवरात्रि में विशेष श्रृंगार किया जाता है और सुबह तथा शाम विशेष पूजन-अर्चन होते हैं। शाम सात बजे आरती के दौरान ढोल नगाड़ों की ध्वनि के बीच हजारों श्रद्धालु माता के दरबार में शामिल होते हैं।
दीपमालिकाओं का आकर्षण:
मंदिर परिसर में स्थापित दीपमालिकाएं भी श्रद्धालुओं का विशेष आकर्षण हैं। ये दीपमालिकाएं दो स्तंभों पर बनाई गई हैं, जिनमें एक शिव और एक शक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि में इन दीपमालिकाओं को लगातार नौ दिनों तक प्रज्वलित किया जाता है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिए दीप प्रज्वलन में हिस्सा लेते हैं।
चार हजार साल पुराने इस मंदिर में नवरात्रि के समय देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं और माता हरसिद्धि से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर में रोजाना भक्तों का मेला लगता है, लेकिन नवरात्रि में इस संख्या में विशेष वृद्धि हो जाती है।











