Thursday, September 24, 2026
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Operation Sindoor : USCC रिपोर्ट का धमाका! ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हार? पहलगाम अटैक को भी ‘आतंकी’ हमला नहीं माना…

pm modi operation sindoor
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नई दिल्ली:अमेरिका की यूएस–चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की नई वार्षिक रिपोर्ट ने भारत की सुरक्षा और कूटनीति से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई कथित ‘4 दिन की लड़ाई’—जिसे ऑपरेशन सिंदूर कहा गया—में पाकिस्तान को सामरिक बढ़त मिली। यह रिपोर्ट भारत में राजनीतिक और सैन्य बहस छेड़ने के लिए काफी है।

राफेल जेट गिराने का जिक्र, पहलगाम हमले को ‘विद्रोही हमला’ बताया
रिपोर्ट का विवादास्पद दावा यह है कि पाकिस्तान ने चीन से मिले आधुनिक हथियारों और खुफिया इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए इस लड़ाई में कम से कम 6 भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराने का दावा किया, जिनमें राफेल जेट भी शामिल थे। हालांकि रिपोर्ट यह भी जोड़ती है कि “स्वतंत्र रूप से केवल तीन भारतीय विमान क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि होती है।” राफेल जैसे हाई-प्रोफाइल एयरक्राफ्ट का नाम आने से रिपोर्ट की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

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एक और चौंकाने वाला उल्लेख यह है कि USCC ने पहलगाम हमले को भारत द्वारा बताए गए “आतंकी हमले” की श्रेणी में नहीं रखा, बल्कि उसे “विद्रोही हमला” कहा है। यह शब्दावली भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा
रिपोर्ट का राजनीतिक असर भारत में तुरंत देखने को मिला। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि,“क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस रिपोर्ट पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराएंगे? हमारी कूटनीति को यह बड़ा झटका है।”

USCC की रिपोर्ट यह भी दावा करती है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइलें और J-10C फाइटर जेट का इस्तेमाल किया। भारत का दावा है कि चीन ने पाकिस्तान को रीयल-टाइम खुफिया जानकारी दी थी, जिसे पाकिस्तान नकारता है और चीन ने भी इस पर कुछ साफ नहीं कहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019–2023 के बीच पाकिस्तान के 82% हथियार चीन से आए।

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इस बीच, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने USCC की रिपोर्ट को “राजनीतिक मकसद वाली” बताते हुए कहा कि अमेरिका चीन की सामरिक व तकनीकी प्रगति को खतरे के रूप में पेश करता है। अखबार ने लिखा कि अमेरिका खुद सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करता है और चीन पर निराधार आरोप थोपता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो, यह रिपोर्ट न सिर्फ भारत–पाक संबंधों को लेकर नए सवाल उठाती है, बल्कि चीन की भूमिका, अमेरिका की समझ और भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया—तीनों को बड़े विमर्श के केंद्र में ला देती है।

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