Thursday, September 24, 2026
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CG NEWS : 2019 की जमीन रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद, दो अदालतों में पहुंचा मामला; विशाल गुप्ता को मिली कानूनी राहत

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CG NEWS : रामानुजगंज/बलरामपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से जुड़े एक जमीन विवाद में न्यायिक कार्यवाहियों को लेकर नया मोड़ सामने आया है। ग्राम भेदमी/पुटसुरा निवासी विशाल कुमार गुप्ता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि विवादित भूमि के मामले में उन्हें निचली अदालत से लेकर सत्र न्यायालय और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। मामले में जमीन की बिक्री, कथित गलत शपथ पत्र, दस्तावेजों की वैधता तथा बाद में की गई शिकायतों को लेकर अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियां हुई हैं।

CG NEWS : प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक विवाद की शुरुआत ग्राम दहेजवार स्थित खसरा नंबर 221 की 0.18 हेक्टेयर भूमि से हुई। विशाल कुमार गुप्ता का आरोप है कि द्वारिका प्रसाद गुप्ता ने उक्त जमीन को अपनी निजी मालिकाना जमीन बताते हुए उनसे चेक के माध्यम से राशि प्राप्त की और 20 मई 2019 को विक्रय पत्र का पंजीयन कराया। बाद में भूमि के स्वरूप और हस्तांतरण की वैधता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

2019 की रजिस्ट्री के बाद सामने आया भूमि के स्वरूप का विवाद

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बाद की जांच एवं राजस्व कार्यवाही में उक्त भूमि के शासकीय पट्टे से संबंधित होने का तथ्य सामने आया। विशाल कुमार गुप्ता पक्ष का दावा है कि ऐसी स्थिति में भूमि के हस्तांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक थी और कथित रूप से गलत तथ्यों के आधार पर शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया।

इसी विवाद को आधार बनाकर राजस्व अधिकारियों द्वारा विक्रय पत्र को प्रभावशून्य घोषित किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।

मामले में विशाल गुप्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर उनसे रकम प्राप्त की गई। हालांकि इन आरोपों का अंतिम परीक्षण संबंधित न्यायिक एवं अन्य सक्षम मंचों पर हुआ है और प्रत्येक पक्ष को अपने बचाव का अधिकार प्राप्त है।

JMFC के आदेश से दर्ज हुआ आपराधिक मामला

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विशाल कुमार गुप्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बलरामपुर ने 10 फरवरी 2025 को आदेश पारित किया। विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि इस आदेश के आधार पर द्वारिका प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 एवं 468 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ।

मामले को प्रकरण क्रमांक 222/2025 के रूप में दर्ज किए जाने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, यह कार्यवाही कथित धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज से जुड़े आरोपों के आधार पर आगे बढ़ी।

सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज

JMFC के आदेश के खिलाफ द्वारिका प्रसाद गुप्ता की ओर से पुनरीक्षण याचिका दायर किए जाने की बात भी प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है। इसके अनुसार प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रामानुजगंज की अदालत में पुनरीक्षण प्रकरण क्रमांक 09/2025 प्रस्तुत किया गया था।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक 26 मई 2026 को न्यायालय ने पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी। विशाल गुप्ता पक्ष इसे अपने पक्ष में दूसरी महत्वपूर्ण न्यायिक राहत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

विवाद यहीं नहीं रुका, हाईकोर्ट तक पहुंची कार्यवाही

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आपराधिक प्रकरण के बाद विवाद ने एक और रूप लिया। इसमें द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता और अलीमुद्दीन द्वारा शिकायतों एवं अन्य कानूनी कार्यवाहियों के माध्यम से विशाल कुमार गुप्ता पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।

विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया है कि लंबे समय बाद जमीन को लेकर शिकायतें उठाई गईं और जमीन तथा धनराशि से संबंधित मांगों को लेकर दबाव बनाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं हो सकी है।

WA No. 871/2026 में हाईकोर्ट का फैसला

मामले का एक महत्वपूर्ण चरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में सामने आया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, WA No. 871 of 2026 में 18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने फैसला सुनाया।

विज्ञप्ति में पीठ के रूप में मुख्य न्यायाधीश श्री कृष्ण राम महापात्र एवं न्यायमूर्ति श्री संतोष शर्मा के नाम का उल्लेख किया गया है। विशाल गुप्ता पक्ष के अनुसार, इस मामले में अलीमुद्दीन की ओर से दायर रिट अपील खारिज कर दी गई।

प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि न्यायालय ने शिकायतकर्ता के वैधानिक अधिकार एवं locus standi से संबंधित प्रश्न पर विचार किया और अपील को स्वीकार नहीं किया। मामले में अधिवक्ता सौरभ साहू की ओर से प्रस्तुत पक्ष को भी विशाल गुप्ता ने सराहनीय बताया है।

भूमि के आवंटन और हस्तांतरण को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार विवादित जमीन वर्ष 1987 में द्वारिका प्रसाद गुप्ता को आवंटित हुई थी। आदेश में दावा है कि 20 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें उक्त जमीन का भूमिस्वामी माना गया।

इसके बाद वर्ष 2019 में जमीन का विक्रय किया गया। विशाल गुप्ता पक्ष के अनुसार, हाईकोर्ट के समक्ष भूमि के हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक होने के प्रश्न पर भी विचार हुआ और न्यायालय ने उस समय पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं मानी।

यही बिंदु पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रारंभिक शिकायत में भूमि को शासकीय पट्टे की जमीन बताते हुए अनुमति की आवश्यकता का प्रश्न उठाया गया था। इसलिए इस मामले में राजस्व अभिलेख, भूमि आवंटन की शर्तें और संबंधित न्यायिक आदेशों की मूल प्रति ही अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का आधार होगी।

विशाल गुप्ता ने कहा—कानून पर भरोसा कायम हुआ

मामले में विशाल कुमार गुप्ता ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विवाद के दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा और अदालतों के समक्ष अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि न्यायालयों में हुई कार्यवाहियों ने उनके विश्वास को मजबूत किया है और उन्हें उम्मीद है कि आगे भी मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब भी महत्वपूर्ण

इस पूरे विवाद में द्वारिका प्रसाद गुप्ता, विकेश गुप्ता और अलीमुद्दीन पर लगाए गए आरोप प्रेस विज्ञप्ति में विशाल कुमार गुप्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इसलिए आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित पक्ष के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि विपक्षी पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया या अलग तथ्य सामने आता है तो उसे भी निष्पक्ष रूप से सामने रखा जाना आवश्यक होगा।

जमीन विवाद ने खड़े किए दस्तावेजी पारदर्शिता के सवाल

यह मामला केवल दो पक्षों के बीच जमीन के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भूमि आवंटन, भूमिस्वामित्व, विक्रय पंजीयन, शपथ पत्र, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलू जुड़े हैं।

विशेषज्ञ दृष्टि से ऐसे मामलों में मूल राजस्व रिकॉर्ड, आवंटन आदेश, नामांतरण एवं भूमिस्वामित्व संबंधी प्रविष्टियां, पंजीकृत विक्रय पत्र तथा न्यायालयों के प्रमाणित आदेश सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट हो सकता है कि विवादित जमीन की कानूनी स्थिति क्या थी और वर्ष 2019 में उसके हस्तांतरण के लिए कौन-कौन सी वैधानिक शर्तें लागू थीं।

दो न्यायिक मंचों पर मिली राहत को लेकर समर्थकों में उत्साह

CG NEWS : विशाल कुमार गुप्ता पक्ष इस घटनाक्रम को अपनी “दोहरी कानूनी जीत” के रूप में देख रहा है। एक ओर JMFC स्तर पर आपराधिक प्रकरण की कार्यवाही और उसके खिलाफ दायर पुनरीक्षण के खारिज होने का दावा है, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट में रिट अपील खारिज होने को महत्वपूर्ण राहत बताया जा रहा है।

CG NEWS : बलरामपुर-रामानुजगंज क्षेत्र के इस जमीन विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने रखा है कि भूमि के पुराने रिकॉर्ड, आवंटन की शर्तें और बाद के हस्तांतरण में दस्तावेजी पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल विशाल कुमार गुप्ता पक्ष ने न्यायालयों में हुई कार्यवाहियों को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण राहत बताते हुए न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास व्यक्त किया है।

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