CGPSC Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। रायपुर की विशेष PMLA अदालत में दाखिल शिकायत के साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज और 99 पन्नों का सारांश शामिल है।
ED के अनुसार, जांच में ग्रामीण विकास समिति के जरिए 45 लाख रुपये की CSR राशि प्राप्त होने का मामला सामने आया। एजेंसी का दावा है कि यह राशि श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की ओर से दो किस्तों में दी गई थी। 2 मार्च 2022 को 20 लाख रुपये और 18 मई 2022 को 25 लाख रुपये समिति के खाते में जमा किए गए।
CGPSC Scam: ED की चार्जशीट के मुताबिक, ग्रामीण विकास समिति के कामकाज में टामन सिंह सोनवानी की भूमिका थी और वे उस अवधि में समिति की गतिविधियों की देखरेख करते थे। जांच एजेंसी ने इस CSR भुगतान को 2021 की CGPSC परीक्षा में एक कारोबारी के बेटे और बहू को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने से जोड़ते हुए जांच की है।
समिति के कामकाज और राशि के उपयोग को लेकर भी जांच की गई। चार्जशीट में उल्लेख है कि 45 लाख रुपये का इस्तेमाल कला महाविद्यालय के निर्माण में किया गया। पूछताछ के दौरान सोनवानी ने राशि के खर्च का पूरा विवरण याद नहीं होने की बात कही।
CGPSC Scam: रिश्तेदारों के चयन का भी जिक्र
ED की चार्जशीट में सोनवानी के कार्यकाल के दौरान CGPSC परीक्षाओं में उनके रिश्तेदारों से जुड़े अभ्यर्थियों के चयन का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने 2020 और 2021 की परीक्षाओं के चयन और CSR भुगतान के बीच संभावित संबंध की जांच की है।
हालांकि, सोनवानी ने पूछताछ के दौरान CSR राशि और अभ्यर्थियों के चयन के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया। उन्होंने इसे संयोग बताया और संबंधित इस्पात कंपनी से किसी निजी या व्यावसायिक संबंध से भी इनकार किया।
CGPSC Scam: संपत्तियों पर भी कार्रवाई
CGPSC Scam: ED ने जांच के दौरान सोनवानी और अन्य आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। एजेंसी की ओर से पहले जारी जानकारी के मुताबिक, जांच में करीब 47 लाख रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किए जाने की कार्रवाई की गई थी। ED का दावा है कि CGPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े लेनदेन और CSR के जरिए प्राप्त 45 लाख रुपये की राशि मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा हैं। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा। ED की जांच अभी जारी है।






