RTI News : बिलासपुर : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी दबाकर बैठने वाले लोक प्राधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग को निर्देशित किया है कि वे जानकारी न देने वाले ‘दोषी अधिकारी’ (Erring Officer) के खिलाफ दो महीने के भीतर जाँच पूरी करें।
RTI News : क्या है पूरा मामला? :रायगढ़ जिले के ग्राम कुंजेमुरा निवासी 62 वर्षीय ऋषिकेश चौधरी ने तहसील कार्यालय डभरा (जिला सक्ती) से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। जब तहसीलदार (सहायक सूचना अधिकारी) ने जानकारी नहीं दी, तो मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी तक पहुँचा।
* 29.11.2021: प्रथम अपीलीय अधिकारी ने तहसीलदार को 10 दिनों के भीतर निःशुल्क जानकारी देने का आदेश दिया।
* अनदेखी: तहसीलदार ने वरिष्ठ अधिकारी के इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
* 25.10.2024: राज्य सूचना आयोग ने द्वितीय अपील पर सुनवाई करते हुए पुनः आदेश दिया कि जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
RTI News : इतने सालों की कानूनी लड़ाई और स्पष्ट आदेशों के बावजूद, जब विभाग ने जानकारी देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, तो याचिकाकर्ता ने न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
RTI News : कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश :याचिकाकर्ता के वकील तपन कुमार चंद्रा की दलीलों को सुनने के बाद, कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने RTI अधिनियम की मूल भावना का मखौल उड़ाया है।
”RTI अधिनियम, 2005 की धारा 18 के तहत यदि कोई अधिकारी जानकारी देने में विफल रहता है, तो सूचना आयोग की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित अधिकारी के विरुद्ध जाँच करे और उचित प्रक्रिया का पालन करे।”
RTI News : न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि :
* राज्य सूचना आयोग (प्रतिवादी नंबर 2) को दो महीने के भीतर इस पूरे प्रकरण की जाँच सुनिश्चित करनी होगी।
* यह जाँच उन ‘दोषी अधिकारियों’ के खिलाफ होगी जिन्होंने आदेशों के बावजूद जानकारी को रोक कर रखा।
* आयोग को RTI अधिनियम में निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
RTI News : अधिकारियों में हड़कंप :इस आदेश के बाद राजस्व विभाग और सूचना अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तहसीलदार और अन्य अधिकारी सूचना के अधिकार को गंभीरता से नहीं लेते। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप ने साफ कर दिया है कि आम जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को अब जवाबदेह ठहराया जाएगा।













