Rewa Kuthulia Fruit Research Center : रीवा, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश का एकमात्र और ऐतिहासिक महत्व रखने वाला रीवा का कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र अब बंद होने के कगार पर है। केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण शोध संस्थान को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं, जिससे स्थानीय लोगों, कृषि विशेषज्ञों और आम प्रेमियों में भारी निराशा है। यह केंद्र न केवल रीवा को विश्वविख्यात सुंदरजा आम की पहचान दिलाने का केंद्र रहा है, बल्कि इसने कई विशिष्ट आमों और अमरूद की प्रजातियों पर शोध कार्य किया है।
Rewa Kuthulia Fruit Research Center : 77 एकड़ में फैला आमों का खजाना
रीवा के कृषि महाविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कुठुलिया अनुसंधान केंद्र की स्थापना 1980 में हुई थी। यह परिसर हालांकि 1966 से वन विभाग के तहत एक बगीचे के रूप में मौजूद था। करीब 77 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र ने आमों और अमरूद की प्रजातियों के संरक्षण और शोध में अमूल्य योगदान दिया है।
सुंदरजा आम : इस केंद्र ने रीवा के सुंदरजा आम को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई, जिसे हाल ही में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है।
ऐतिहासिक किस्में : यहां राजा-महाराजाओं और युद्धों के नाम पर भी आम के वृक्ष मौजूद हैं। इनमें रीवा रियासत के महाराज मार्तण्ड सिंह और गुलाब सिंह के नाम पर गुलाब भोग प्रसिद्ध है। विंध्य के मशहूर युद्ध के नाम पर चौसा किस्म भी प्रमुख है।
100 से ज्यादा प्रजातियां: इस अनुसंधान केंद्र में देशभर की मशहूर 100 से अधिक आम की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें आम खास, दशहरी, बंगलोरा, आम्रपाली और लंगड़ा शामिल हैं।
अमरूद का शोध: आम के साथ-साथ, यह केंद्र अमरूद की करीब 70 प्रजातियों पर भी शोध करता रहा है।
बंद होने का असर और बचाव के प्रयास
केंद्र के बंद होने से यहां के अद्वितीय वृक्षों के रखरखाव, नए वृक्षों के रोपण और भविष्य में होने वाले शोध कार्य पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा। साथ ही, इन पेड़ों की सेवा में लगे श्रमिकों के रोजगार और भरण-पोषण पर भी संकट आ जाएगा।
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इस विरासत को बचाने के लिए अब स्थानीय स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। इस संबंध में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित रीवा के सांसद को भी ज्ञापन सौंपा गया है। अब सभी की निगाहें जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस महत्वपूर्ण फल अनुसंधान केंद्र को बंद होने से बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।











