[Nishaanebaz News] Raisen News:राजू बैरागी\ रायसेन/उदयपुरा। रायसेन जिले के उदयपुरा स्थित शासकीय सांदीपनि विद्यालय में बसों की कमी ने हजारों विद्यार्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। स्कूल में परिवहन सुविधा को व्यवस्थित करने के लिए प्रबंधन ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत एक दिन छात्र और अगले दिन छात्राएं बस से स्कूल पहुंचेंगी। इस व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने भी संज्ञान लिया है।
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने और बसें सीमित होने के कारण यह व्यवस्था अस्थायी तौर पर लागू की गई है। स्कूल का कहना है कि शासन से अतिरिक्त बसों की मांग की गई है और बसों की संख्या बढ़ने के बाद विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल आने की सुविधा दी जाएगी।
2800 विद्यार्थियों का प्रवेश, 1700 ने मांगी बस सुविधा
शासकीय सांदीपनि विद्यालय की प्राचार्य वंदना मिश्रा के अनुसार, इस शैक्षणिक सत्र में स्कूल में करीब 2800 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें से लगभग 1700 विद्यार्थियों ने स्कूल आने-जाने के लिए बस सुविधा के लिए आवेदन किया है।
Raisen News: इसके मुकाबले विद्यालय के पास फिलहाल केवल 16 बसें उपलब्ध हैं। एक बस में करीब 55 से 60 विद्यार्थियों को परिवहन किया जा सकता है। ऐसे में मौजूदा बसों के जरिए रोजाना करीब 1000 विद्यार्थियों को ही स्कूल लाना संभव हो पा रहा है।यही वजह है कि स्कूल प्रबंधन ने बस सुविधा का उपयोग करने वाले विद्यार्थियों को अलग-अलग दिन स्कूल लाने की व्यवस्था बनाई है।
एक दिन छात्र तो अगले दिन छात्राओं की बारी
नई व्यवस्था के तहत एक दिन छात्रों को बसों के माध्यम से स्कूल लाया जाएगा और अगले दिन छात्राओं को बस सुविधा दी जाएगी। इसके चलते बस से आने वाले विद्यार्थियों की स्कूल में उपस्थिति रोजाना एक जैसी नहीं रहेगी।
इस फैसले के बाद अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा सवाल पढ़ाई को लेकर उठ रहा है। उनका कहना है कि स्कूल में नियमित कक्षाएं नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। खासकर परीक्षा और पाठ्यक्रम पूरा करने के समय इसका असर देखने को मिल सकता है।
क्या एक दिन का पाठ अगले दिन भी पढ़ाया जाएगा?
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए एक समूह को जिस दिन जो पाठ पढ़ाया जाएगा, अगले दिन दूसरे समूह को भी वही पाठ पढ़ाया जाएगा। यानी छात्रों और छात्राओं को अलग-अलग दिन बुलाए जाने के बावजूद दोनों समूहों को समान पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।हालांकि, सवाल यह है कि अलग-अलग दिनों में कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई, गतिविधियों, प्रैक्टिकल और अन्य शैक्षणिक कार्यों में कितनी निरंतरता बनी रहेगी।
निजी साधन से आने वाले छात्र रोज कर सकेंगे पढ़ाई
Raisen News: स्कूल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन विद्यार्थियों के पास अपना निजी वाहन या आने-जाने का अन्य साधन है, वे हर दिन स्कूल आ सकते हैं। उन विद्यार्थियों के लिए स्कूल आने पर कोई रोक नहीं है।
दूसरी ओर, ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूल बस ही मुख्य परिवहन साधन है। ऐसे विद्यार्थियों को नई व्यवस्था के कारण सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अतिरिक्त बसों की मांग, सरकार से उम्मीद
प्राचार्य वंदना मिश्रा के मुताबिक, स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या और बस सुविधा की मांग को देखते हुए शासन से अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने की मांग की गई है। उनका कहना है कि जैसे ही अतिरिक्त बसें उपलब्ध होंगी, सभी विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्कूल लाने की व्यवस्था की जा सकेगी।स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था बसों की कमी के कारण बनाई गई है और इसे स्थायी व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
जिला शिक्षा अधिकारी ने लिया मामले का संज्ञान
स्कूल की इस व्यवस्था की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन से व्यवस्था की जानकारी ली है।अब शिक्षा विभाग के सामने यह चुनौती है कि परिवहन सुविधा की समस्या का जल्द समाधान कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित रूप से चल सके।
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अभिभावकों की चिंता- परिवहन की समस्या का खामियाजा बच्चों को क्यों?
Raisen News: इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बसों की कमी का असर विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई पर क्यों पड़े? अभिभावकों की मांग है कि शासन और शिक्षा विभाग जल्द से जल्द अतिरिक्त बसों की व्यवस्था करें, ताकि छात्रों और छात्राओं को बारी-बारी से स्कूल बुलाने की जरूरत न पड़े।
फिलहाल सांदीपनि विद्यालय की यह व्यवस्था चर्चा में है। एक तरफ स्कूल प्रबंधन इसे परिवहन समस्या का अस्थायी समाधान बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों की नियमित शिक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अब देखना होगा कि अतिरिक्त बसों की व्यवस्था कब तक होती है और विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल आने की सुविधा कब बहाल हो पाती है।




