Singrauli Child Death: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। नवजीवन विहार स्थित एक निजी क्लिनिक में इलाज के दौरान महज 4 साल की बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है, वहीं परिजनों ने क्लिनिक संचालक डॉ. एस.के. श्रीवास्तव पर इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाया है।घटना के बाद परिजन काफी आक्रोशित हैं और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान बरती गई कथित लापरवाही के कारण बच्ची की हालत बिगड़ी और उसकी जान चली गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मौत की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इलाज के दौरान बिगड़ी बच्ची की हालत
जानकारी के अनुसार, बच्ची को इलाज के लिए नवजीवन विहार स्थित निजी क्लिनिक लाया गया था। यहां उपचार के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई।बच्ची की मौत के बाद परिवार ने इलाज की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर सही उपचार और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलती तो स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी होगी।
डॉक्टर पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
बच्ची के परिजनों ने क्लिनिक संचालक डॉ. एस.के. श्रीवास्तव पर इलाज में कथित लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि बच्ची के इलाज में ऐसी चूक हुई, जिसकी वजह से उसकी जान चली गई।मामले के सामने आने के बाद अब यह जांच का विषय है कि बच्ची को क्लिनिक में किस हालत में लाया गया था और डॉक्टर की ओर से उसे किस तरह का उपचार दिया गया।
कौन सी दवाएं दी गईं, अब इस पर भी सवाल
बच्ची की मौत के बाद इलाज से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होगा कि क्लिनिक पहुंचने के समय बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति कैसी थी।इसके साथ ही उपचार के दौरान उसे कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, कौन सी चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई और उसकी हालत में बदलाव कब आया, इसकी जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है।
गंभीर हालत में हायर सेंटर भेजा गया या नहीं?
मामले में यह सवाल भी अहम है कि अगर बच्ची की स्थिति इलाज के दौरान गंभीर हो गई थी, तो क्या उसे समय रहते किसी बड़े अस्पताल या हायर सेंटर रेफर किया गया था।इसके अलावा क्लिनिक में आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं, इसकी भी जांच की जरूरत है। इन सभी सवालों के जवाब मेडिकल रिकॉर्ड और विभागीय जांच के बाद सामने आ सकते हैं।
निजी क्लिनिकों की व्यवस्था पर भी सवाल
इस घटना के बाद इलाके में संचालित निजी क्लिनिकों की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह देखा जाना जरूरी होगा कि ऐसे क्लिनिकों में इलाज करने वाले डॉक्टरों की आवश्यक योग्यता और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की नियमित जांच की जाती है या नहीं।हालांकि, इस एक घटना के आधार पर सभी निजी क्लिनिकों की व्यवस्था पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संबंधित क्लिनिक और डॉक्टर के मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
बच्ची की मौत के बाद परिवार ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अगर जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।फिलहाल परिवार अपनी मासूम बच्ची को खोने के गम में है और मामले में न्याय की मांग कर रहा है। बच्ची की मौत की असली वजह और इलाज के दौरान किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।






