Public Grievance Redressal Indore : इंदौर (10 फरवरी 2026): इंदौर कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई को अब और भी ‘यूजर फ्रेंडली’ बना दिया गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत अब जनसुनवाई में आने वाले लोगों को अपनी अर्जी लेकर भटकना नहीं पड़ेगा। नई व्यवस्था के अनुसार, कलेक्टर कार्यालय के हर प्रवेश द्वार पर तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो सीधे लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं।
भटकाव होगा खत्म, त्वरित मिलेगी राहत
अक्सर जनसुनवाई के दौरान फरियादी इस बात को लेकर भ्रमित रहते थे कि उन्हें अपनी समस्या किस विभाग या किस अधिकारी को बतानी है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए कलेक्टर ने प्रवेश द्वार पर ही हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्था को सक्रिय किया है। यहाँ तैनात अधिकारी न केवल लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं, बल्कि उनकी शिकायतों को तत्काल वर्गीकृत कर संबंधित विभाग तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन का आपसी तालमेल
इस नवाचार की खास बात यह है कि इसमें राजस्व और पुलिस प्रशासन को एक साथ जोड़ा गया है। गेट पर तहसीलदार के साथ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहते हैं, जिससे जमीनी विवाद या कानूनी शिकायतों का मौके पर ही प्राथमिक परीक्षण हो जाता है। इससे कलेक्टर कार्यालय के भीतर भीड़ कम होगी और गंभीर मामलों पर अधिकारियों का ध्यान केंद्रित हो सकेगा।
कलेक्टर शिवम वर्मा का विजन
कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस पहल के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि आम आदमी की समस्याओं का समाधान न्यूनतम समय और बिना किसी मानसिक परेशानी के हो। जब अधिकारी स्वयं गेट पर उपलब्ध होंगे, तो लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा और उन्हें कतारों में खड़े होकर समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा।
आम जनता ने सराहा
मंगलवार को हुई जनसुनवाई में इस नई व्यवस्था का असर साफ देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्गों और महिलाओं ने इस पहल की सराहना की, क्योंकि उन्हें अब बड़े दफ्तर की सीढ़ियाँ चढ़ने और सही बाबू को ढूँढने की मशक्कत नहीं करनी पड़ रही है।













