नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश में टैक्स का एक समान ढांचा सभी वस्तुओं पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मर्सिडीज जैसी महंगी कार खरीदने वाले और साधारण हवाई चप्पल लेने वाले पर एक ही दर से टैक्स लगाना उचित नहीं है। इसका कारण देश में विभिन्न क्षेत्रों का असमान आर्थिक विकास है।
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सीतारमण ने बताया कि भारत के कुछ इलाके अत्यधिक विकसित हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्र अभी विकास के प्रारंभिक स्तर पर हैं। ऐसे में सभी उत्पादों पर एक समान टैक्स लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में, जब पूरे देश में आर्थिक विकास का स्तर समान होगा, तब वन नेशन-वन टैक्स की अवधारणा पर विचार किया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के सवाल पर कहा कि इसे लागू करने के लिए राज्यों की सहमति जरूरी होगी। फिलहाल यह जीएसटी प्रणाली में शामिल नहीं है, लेकिन जब राज्य तैयार होंगे, इसे शामिल किया जा सकता है।
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निर्मला सीतारमण ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने जीएसटी स्लैब को चार से घटाकर दो कर दिया है और आगे की योजना में एक समान दर की दिशा में कार्य जारी रहेगा। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि जैसे बेंज कार और हवाई चप्पल पर एक समान टैक्स नहीं हो सकता, उसी तरह अन्य वस्तुओं पर भी उनके आर्थिक स्तर के अनुसार टैक्स निर्धारित किया जाता रहेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह निर्णय उपभोक्ताओं और व्यापार दोनों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उनका यह मानना है कि विकसित भारत में आने वाले समय में वन नेशन-वन टैक्स का कार्यान्वयन संभव होगा।










