Thursday, August 20, 2026
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India Bond Yield Surge 2026 : बढ़ती महंगाई और रुपये की गिरावट से बॉन्ड यील्ड 6.93% पर पहुंची; रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका तेज

India Bond Yield Surge 2026 : मुंबई। भारतीय बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड शुक्रवार को 6 आधार अंक (basis points) उछलकर 6.93 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले दिन 6.87 प्रतिशत पर बंद हुई थी। बॉन्ड यील्ड में आई इस तेजी ने बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों के बीच भविष्य में महंगाई बढ़ने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने की चिंताओं को गहरा दिया है। पिछले एक महीने में बॉन्ड यील्ड में कुल 26 आधार अंकों की बढ़त दर्ज की जा चुकी है।

बाजार में इस उथल-पुथल का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का स्तर 94 के नीचे गिरना देश के राजकोषीय और बाहरी संतुलन पर दबाव बढ़ा रहा है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है, जिससे निवेशक अब जोखिम से बचने के लिए अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के स्तर को भी पार कर सकती है।

कमजोर रुपया सीधे तौर पर आयात को महंगा बनाता है, जिससे घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ता है। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़त का सीधा संकेत यह है कि निवेशक भविष्य में उच्च मुद्रास्फीति (Inflation) की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए आरबीआई को रेपो रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। हालांकि, फरवरी 2026 की समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था, लेकिन जीडीपी विकास दर के अनुमान को 7.3 से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत और खुदरा महंगाई (CPI) के अनुमान को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.1 प्रतिशत कर दिया था।

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की महंगी कीमतों का असर जल्द ही पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा, क्योंकि यह पेट्रोकेमिकल्स और लॉजिस्टिक्स की पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। मेवेनार्क के सह-संस्थापक फणीशेखर पोनांगी के अनुसार, कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण महंगाई बढ़ने की उम्मीद है, जो आरबीआई को बाजार की उम्मीदों से पहले ही ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाली कम प्रेषण राशि (Remittances) और बढ़ता व्यापार घाटा रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।

वर्तमान में बाजार एक लंबी आर्थिक अनिश्चितता के डर से जूझ रहा है। युद्ध के लंबा खिंचने से तेल के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का जोखिम बढ़ गया है, जिससे अल्पकालिक मूल्य जोखिम अब दीर्घकालिक आपूर्ति जोखिम में बदल रहा है। जब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी या रुपये में स्थिरता नहीं आती, तब तक बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बना रहने की संभावना है।

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