निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन कर देश को एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात दी। यह एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल हो गया है और भविष्य में इसके चारों चरण पूरे होने के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की दिशा में अग्रसर है।
देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है। करीब 29,560 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2018 में केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी। इसे चार चरणों में विकसित किया जा रहा है।
बेहतर कनेक्टिविटी से मिलेगा फायदा
यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेस-वे के पास स्थित है, जिससे दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। भविष्य में इसे मेट्रो और प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों के लिए सफर और आसान हो जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट
एयरपोर्ट के पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे तैयार किया गया है, जो बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए उपयुक्त है। यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एडवांस एयरफील्ड लाइटिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
#WATCH | जेवर, ग्रेटर नोएडा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के फेज़-1 का उद्घाटन करने वाले हैं। एयरपोर्ट को लगभग 11,200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से बनाया गया है। pic.twitter.com/Z9LiLWgkZw
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 28, 2026
यात्रियों की क्षमता और विस्तार योजना
शुरुआती चरण में यह एयरपोर्ट सालाना 12 मिलियन यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। भविष्य में इसके सभी फेज पूरे होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 70 मिलियन यात्रियों तक पहुंच जाएगी।
कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब
इस एयरपोर्ट में एक इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स ज़ोन भी विकसित किया गया है। शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन माल संभालने की है, जिसे बढ़ाकर 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकेगा।
ग्लोबल एविएशन हब की ओर कदम
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पूरक बनेगा। दोनों एयरपोर्ट मिलकर एक इंटीग्रेटेड एविएशन सिस्टम के रूप में काम करेंगे, जिससे यात्रियों की भीड़ कम होगी और NCR क्षेत्र वैश्विक एविएशन हब के रूप में उभर सकेगा।
यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









