Wildlife & Forest Conservation in Chhattisgarh: रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में बाघों की संख्या में वृद्धि करने और उनके लिए एक सुरक्षित, विस्तृत तथा निर्बाध प्राकृतिक आवास विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार एवं वन विभाग ने एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। योजना के तहत पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से 5 बाघों को स्थानांतरित (Translocate) कर छत्तीसगढ़ के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में लाया जाएगा।
इसके साथ ही, बाघों के मुख्य विचरण क्षेत्रों (Core Areas) में इंसानी दखल कम करने के लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का चरणबद्ध और स्वैच्छिक पुनर्वास (Voluntary Resettlement) शुरू किया जा रहा है।
3 बाघिन लाने को मिली प्रशासनिक मंजूरी, 2 का प्रस्ताव लंबित
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश से तीन बाघिन (Female Tigers) लाने की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया को हरी झंडी मिल चुकी है।
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इन तीन बाघिनों को अचानकमार टाइगर रिजर्व (मुंगेली/बिलासपुर) और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा।
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इसके अलावा, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (गरियाबंद) के लिए दो बाघ (नर व मादा) लाने का एक अलग प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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शासन से अंतिम स्वीकृति मिलते ही प्रदेश में कुल 5 नए बाघों का आगमन होगा, जिससे राज्य में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) और बाघों की आबादी में मजबूती आएगी।
अचानकमार और उदंती-सीतानदी के गांवों का होगा पुनर्वास
बाघों को सुरक्षित और निर्बाध जंगल देने के लिए वनग्रामों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है:
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अचानकमार टाइगर रिजर्व: कोर एरिया में स्थित बिरापानी, छिरहट्टा और तिलईडबरा गांवों के 157 परिवारों का स्वैच्छिक पुनर्वास प्रस्तावित है। ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद पुनर्वास स्थलों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: यहां के लगभग 50 वनग्रामों को पुनर्वास प्रक्रिया के लिए चिन्हित किया गया है।
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ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य: वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गांव का विस्थापन संबंधित ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।
बारनवापारा अभयारण्य में भी शुरू होगी पुनर्वास योजना
टाइगर रिजर्व्स के साथ-साथ महासमुंद-बलौदाबाजार सीमा पर स्थित बारनवापारा अभयारण्य में भी वनग्रामों के विस्थापन की तैयारी तेज कर दी गई है।
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वर्तमान में अभयारण्य के भीतर 22 से 25 वनग्राम बसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं।
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इससे पूर्व एक दशक पहले बारनवापारा के रामपुर, लाटादादर और नयापारा गांवों के 399 परिवारों को महासमुंद क्षेत्र में सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया जा चुका है। अब शेष बचे गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से विस्थापित किया जाएगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) में आएगी कमी
वन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां, मवेशियों की चराई और बस्तियां बढ़ने से वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरिडोर और शिकार का दायरा सीमित हो जाता है। भोजन की तलाश में बाघ और अन्य हिंसक जानवर इंसानी बस्तियों का रुख करते हैं, जिससे जन-धन की हानि होती है।
“अचानकमार टाइगर रिजर्व के 157 परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन के नीति-निर्देशों के तहत चयनित पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के निर्माण कार्य वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तीव्र गति से संचालित किए जा रहे हैं।”
— ओ.पी. यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन्यजीव प्रबंधन, छत्तीसगढ़
पुनर्वास योजना पूरी होने से जंगलों का कोर एरिया मानव-मुक्त होगा, जिससे बाघों को पर्याप्त शिकार और विस्तृत दायरा मिलेगा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।




