Golden Poison Dart Frog Facts: सांप से भी ज्यादा जहरीला है यह नन्हा मेंढक; छूने मात्र से फैल सकता है जानलेवा बैट्राकोटॉक्सिन

Golden Poison Dart Frog Facts: नई दिल्ली। जब भी दुनिया के सबसे जहरीले और घातक जीवों की बात होती है, तो अमूमन लोगों के जेहन में किंग कोबरा या वाइपर जैसे खतरनाक सांपों का नाम आता है। हालांकि, प्राणी विज्ञान (Zoology) के अनुसार पृथ्वी पर एक ऐसा जीव भी मौजूद है जो आकार में महज 5 से 6 सेंटीमीटर का है, लेकिन उसका विष बड़े-बड़े शिकारी जानवरों और सांपों से भी कई गुना अधिक शक्तिशाली माना जाता है। इस जीव को गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग (Golden Poison Dart Frog) कहा जाता है।

वैज्ञानिक भाषा में फाइलोबेट्स टेरिबिलिस (Phyllobates terribilis) के नाम से जाना जाने वाला यह मेंढक मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के देश कोलंबिया के प्रशांत तटीय वर्षावनों (Pacific Coastal Rainforests) में पाया जाता है।13 रोचक विषैले डार्ट मेंढकों के तथ्य - रेनफॉरेस्ट क्रूज़

शरीर से निकलता है शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन ‘बैट्राकोटॉक्सिन’

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इस मेंढक का चमकीला पीला या सुनहरा रंग प्रकृति की एक स्पष्ट चेतावनी (Aposematism) है, जो दूसरे शिकारी जीवों को इससे दूर रहने का संकेत देता है।

  • न्यूरोटॉक्सिन का असर: इस मेंढक की त्वचा से बैट्राकोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नामक एक बेहद घातक रसायन निकलता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन है, जो सीधे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों के काम करने की क्षमता को ब्लॉक कर देता है।

  • घातक क्षमता: एक वयस्क गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग के शरीर में मौजूद विष की मात्रा इतनी अधिक होती है कि वह एक साथ कई वयस्क इंसानों की जान लेने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, यह मेंढक सांप की तरह डंक या दांतों से काटकर जहर नहीं छोड़ता, बल्कि इसका विष इसकी त्वचा पर रिसता है।Poison Dart Frog – Dendrobatidae – Facts About Animals

क्या इस मेंढक को छूते ही मौत हो जाती है?

सोशल मीडिया और आम धारणाओं में अक्सर यह दावा किया जाता है कि इस मेंढक को सिर्फ छूने मात्र से इंसान की तुरंत मौत हो जाती है। वैज्ञानिकों और जीव विशेषज्ञों ने इस दावे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह मेंढक सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करता।

खतरा कब होता है? विष का जानलेवा प्रभाव तब शुरू होता है जब मेंढक की त्वचा पर मौजूद बैट्राकोटॉक्सिन रसायन इंसान के शरीर पर लगे किसी कटे हुए घाव, खरोंच, आंख, मुंह या श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) के सीधे संपर्क में आता है। इसलिए जंगलों में ऐसे चमकीले रंगों वाले मेंढकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।आखिर दुनिया के सबसे जहरीले मेंढकों की क्यों होती है तस्करी? - Most Poisonous Frogs In The World Poison Dart Frog Smuggling In Worldwide Know Reason - Amar Ujala Hindi News Live

भोजन से बनता है जहर: चिड़ियाघर में बेअसर हो जाता है यह मेंढक

इस मेंढक से जुड़ा एक सबसे दिलचस्प वैज्ञानिक पहलू इसका भोजन है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मेंढक अपने शरीर में खुद विष पैदा नहीं करता।

  • प्राकृतिक आहार: जंगल में रहते हुए यह कुछ विशेष प्रजाति की चींटियां, जहरीले बीटल और छोटे आर्थ्रोपोड (Arthropods) खाता है। इन कीटों में मौजूद रसायनों को पचाकर इसका शरीर बैट्राकोटॉक्सिन में परिवर्तित कर देता है।

  • नियंत्रित वातावरण का असर: जब इस मेंढक को चिड़ियाघर या कृत्रिम वातावरण में पाला जाता है और इसे सामान्य कीड़े-मकोड़े खाने को दिए जाते हैं, तो कुछ समय बाद इसके शरीर से विषैला तत्व पूरी तरह समाप्त हो जाता है और यह हानिरहित हो जाता है।Hvilket amfibium er giftigst? | illvit.no

क्यों पड़ा ‘पॉइजन डार्ट फ्रॉग’ नाम?

इस मेंढक के नाम के पीछे एक प्राचीन और ऐतिहासिक वजह जुड़ी हुई है। कोलंबिया के वर्षावनों में रहने वाली स्वदेशी जनजातियां (Indigenous Communities) सदियों से शिकार के लिए अपनी फूँक-नली वाली तितलियों यानी ब्लोगन डार्ट्स (Blowgun Darts) की नोक पर इस मेंढक की त्वचा को रगड़कर विष लगाती थीं। इस विषैले तीर से किया गया शिकार तुरंत पंगु हो जाता था।

वर्तमान समय में जैव विविधता के संरक्षण हेतु गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग को संरक्षित प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है और इसके अवैध शिकार या प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने पर कड़ा कानूनी प्रतिबंध लागू है।

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