PM मोदी के न्योते पर भी BRICS सम्मेलन में नहीं आएंगे तारिक रहमान? भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया मोड़

Rahul Goshwami

BRICS Summit 2026: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS सम्मेलन के बीच भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। बांग्लादेश ने BRICS समिट में शामिल होने के भारत के निमंत्रण पर अब तक औपचारिक सहमति नहीं दी है। इसे दोनों देशों के बीच चल रही खटास के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दो अलग-अलग मौकों के लिए आमंत्रित किया था। पहला निमंत्रण द्विपक्षीय यात्रा का था, जबकि दूसरा बिम्स्टेक के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए था।

भारत-बांग्लादेश संबंध ऐसे समय चर्चा में आए हैं, जब BRICS सम्मेलन में कई क्षेत्रीय संगठनों के अध्यक्ष देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें आसियान, अफ्रीकी संघ, खाड़ी सहयोग परिषद, लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों के संगठन तथा यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के अध्यक्ष देश शामिल हैं।बांग्लादेश बिम्स्टेक का मौजूदा अध्यक्ष है। ऐसे में उसका सम्मेलन से दूर रहना कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ढाका ने न्योते पर उठाए सवाल
भारत-बांग्लादेश संबंध को लेकर बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को BRICS सम्मेलन के लिए उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार को निमंत्रण ही नहीं मिला तो बांग्लादेश कैसे सम्मेलन में शामिल हो सकता है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री रहमान की भारत की पहली यात्रा बहुपक्षीय कार्यक्रम के तौर पर नहीं होगी।बांग्लादेश की ओर से यह भी कहा गया कि फिलहाल वह द्विपक्षीय बातचीत और यात्राओं पर अधिक ध्यान दे रहा है।
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‘आपसी सम्मान’ पर ढाका का जोर
भारत-बांग्लादेश संबंध में आगे की दिशा को लेकर बांग्लादेश ने ‘आपसी सम्मान’ को महत्वपूर्ण बताया है। ढाका का कहना है कि जब दोनों देशों के बीच माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान कायम रहेगा, तब द्विपक्षीय यात्राओं को आगे बढ़ाया जाएगा।इस रुख से साफ है कि बांग्लादेश प्रधानमंत्री की भारत यात्रा को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

शेख हसीना की वापसी का मुद्दा भी अहम
भारत-बांग्लादेश संबंध में सबसे संवेदनशील मुद्दों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मामला भी शामिल है। बांग्लादेश लगातार भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग करता रहा है।शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े छात्र आंदोलन के बाद भारत आ गई थीं और तब से यहां रह रही हैं। ढाका की मौजूदा सरकार उनकी वापसी का मुद्दा भारत के साथ संबंधों में लगातार उठाती रही है।बांग्लादेश की ओर से यह भी कहा गया है कि हाल में भारत की जमीन से शेख हसीना की ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस होने से प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर चल रही तैयारियों पर असर पड़ा।

दिल्ली और ढाका के बीच संपर्क जारी
हालांकि भारत-बांग्लादेश संबंध पूरी तरह ठहर नहीं गए हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बांग्लादेश के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ढाका में हुई हालिया उच्चस्तरीय राजनयिक बातचीत को सकारात्मक कदम बताया था। उन्होंने बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के बीच हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया।

BRICS समिट के बीच बढ़ा कूटनीतिक सस्पेंस
BRICS सम्मेलन में रूस, चीन, ईरान समेत कई बड़े देशों के नेता हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। ऐसे समय बांग्लादेश की संभावित गैरमौजूदगी ने इस क्षेत्रीय रिश्ते को फिर चर्चा में ला दिया है।फिलहाल ढाका की ओर से निमंत्रण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि नई दिल्ली दोनों देशों के बीच संपर्क और संबंध आगे बढ़ाने की बात कह रही है। ऐसे में भारत-बांग्लादेश संबंध आने वाले दिनों में किस दिशा में जाते हैं, इस पर BRICS सम्मेलन के दौरान भी नजर बनी रहेगी।

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