Balaghat ITI News: बालाघाट (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश कौशल विकास संचालनालय द्वारा शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के ट्रेनिंग ऑफिसर्स (TOs) के लिए जारी की गई पदोन्नति (प्रमोशन) सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शासकीय आईटीआई बालाघाट में पदस्थ आठ ट्रेनिंग ऑफिसर्स ने इस सूची पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अधिकारियों का सीधा आरोप है कि पदोन्नति का मुख्य आधार मानी जाने वाली गोपनीय चरित्रावली (CR/Confidential Report) के मूल्यांकन में निर्धारित नियमों और निष्पक्षता का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।
नाराज शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से निष्कलंक सेवा दे रहे हैं और उनके पढ़ाए छात्रों ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नाम रोशन किया है, फिर भी पदोन्नति सूची में उनकी उपेक्षा की गई है।
3 महीने बाद सेवानिवृत्ति, फिर भी सबसे वरिष्ठ TO का नाम सूची से गायब
बालाघाट आईटीआई के सबसे सीनियर ट्रेनिंग ऑफिसर दशरथ बिसेन, जिनकी सेवानिवृत्ति में महज 3 माह का समय शेष है, पदोन्नति सूची में अपना नाम न देखकर अत्यंत व्यथित हैं।
दशरथ बिसेन ने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया:
“अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान मुझे कभी कोई कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) तक नहीं मिला। मेरी पूरी सेवा चरित्रावली बेदाग रही है। इसके बावजूद गोपनीय चरित्रावली में जानबूझकर कम अंक दर्शाकर मुझे प्रमोशन से वंचित कर दिया गया। मैंने इस अन्याय के खिलाफ संस्थान के प्राचार्य से लेकर विभाग के सचिव तक को ज्ञापन सौंपा है। यदि न्याय नहीं मिला तो मैं माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगा।”
सभी 5 महिला ट्रेनिंग ऑफिसरों की अनदेखी, वरिष्ठता दरकिनार
प्रमोशन में पक्षपात और अनियमितता का आरोप सिर्फ वरिष्ठता तक सीमित नहीं है। महिला अधिकारियों ने भी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
महिला ट्रेनिंग ऑफिसर रत्नमाला गनवीर ने जानकारी देते हुए बताया:
-
बालाघाट आईटीआई में वर्तमान में पांच महिला ट्रेनिंग ऑफिसर पदस्थ हैं।
-
वरिष्ठता सूची (Seniority List) में उनका नाम काफी ऊपर दर्ज था।
-
इसके बावजूद एक भी महिला अधिकारी को पदोन्नति के योग्य नहीं माना गया और सूची में उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।
प्राचार्यों और सचिव से शिकायत, न्याय की गुहार
प्रमोशन से वंचित आठों ट्रेनिंग ऑफिसर्स का कहना है कि कौशल विकास संचालनालय द्वारा जिस प्रक्रिया से गोपनीय चरित्रावली के अंक तय किए गए हैं, वह पूरी तरह से अपारदर्शी है। जब तक नियमों के अनुसार पूरी सूची का पुनरीक्षण नहीं किया जाता, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन और विभाग द्वारा उनके आवेदन पर तत्काल संज्ञान लेकर सुधार नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से न्यायालय की शरण लेंगे।







