Smart Meter Check Campaign: रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में स्मार्ट मीटर और अप्रत्याशित रूप से ज्यादा आ रहे बिजली बिलों को लेकर आम जनता में आक्रोश का माहौल है। राज्य के कई स्थानों पर प्रदर्शन और विरोध की खबरें आ रही हैं। जनता के बढ़ते गुस्से और राजनीतिक बयानबाजी के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए मामले पर विस्तृत सफाई पेश की है।
पावर कंपनी ने स्मार्ट मीटर में किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी या तेज चलने के दावों को खारिज करते हुए इसे महज अफवाह करार दिया है।
मई-जून की भीषण गर्मी बनी भारी बिल का मुख्य कारण
CSPDCL द्वारा प्रस्तुत अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, मई और जून के महीनों में प्रदेश में पड़ी भीषण गर्मी के कारण अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर (AC), कूलर और पंखों का अत्यधिक उपयोग हुआ। इस वजह से बिजली की खपत कई गुना बढ़ गई, जिसका असर वर्तमान में प्राप्त हुए बिलों पर दिख रहा है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार:
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रायपुर शहर: रायपुर के 3.11 लाख से अधिक स्मार्ट मीटरों में जून के दौरान कुल 10 करोड़ 85 लाख यूनिट की खपत दर्ज हुई थी। वहीं जुलाई महीने में मौसम बदलने और तापमान गिरने से यह खपत घटकर 7 करोड़ 77 लाख यूनिट रह गई। यानी बरसात में बिजली खपत में सीधे 28 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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दुर्ग शहर: 400 यूनिट से अधिक खपत वाले 240 स्मार्ट मीटरों के अध्ययन में देखा गया कि जून में जहां 1,65,411 यूनिट की खपत थी, वहीं जुलाई में यह 53 प्रतिशत घटकर महज 76,257 यूनिट रह गई।
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बिलासपुर शहर: 400 यूनिट से अधिक खपत वाले 9,717 मीटरों की स्टडी में जुलाई महीने के दौरान खपत में 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
पावर कंपनी का कहना है कि जुलाई महीने की घटी हुई खपत का बिल जब अगस्त में उपभोक्ताओं को मिलेगा, तो राशि पिछले महीने की तुलना में काफी कम होगी।
मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना और अफोर्डिंग चार्ज का गणित
राज्य में लागू मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक आधा बिजली बिल (हाफ बिजली बिल योजना) का लाभ मिलता है।
हालांकि, गर्मी के दिनों में एसी का उपयोग करने वाले घरों में कुल खपत 400 यूनिट की सीमा को पार कर जाती है। ऐसे में उपभोक्ता इस राहत योजना के दायरे से बाहर हो जाते हैं और उन्हें पूरी दर से भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा, स्वीकृत संविदा भार (लोड) से अधिक बिजली का उपयोग करने पर लोड बढ़ने के कारण नियमानुसार अतिरिक्त अफोर्डिंग चार्ज (स्वीकृत भार से अधिक उपयोग पर लगने वाला शुल्क) भी जुड़ जाता है, जिससे बिल की राशि अचानक बढ़ी हुई महसूस होती है।
‘मोर बिजली ऐप’ से रोज जांचें खपत, शंका होने पर लगेगा चेक मीटर
उपभोक्ताओं की शंकाओं के समाधान और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बिजली विभाग ने कई उपाय सुझाए हैं:
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मोर बिजली ऐप (Mor Bijli App): सामान्य मीटरों में जहां केवल महीने के अंत में ही कुल खपत का पता चलता था, वहीं स्मार्ट मीटर के उपभोक्ता अपने मोबाइल में ‘मोर बिजली ऐप’ डाउनलोड करके प्रतिदिन की यूनिट खपत (Daily Power Consumption) को खुद ट्रैक कर सकते हैं।
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चेक मीटर की सुविधा: यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका स्मार्ट मीटर तेज चल रहा है, तो विभाग द्वारा उसके परिसर में एक अलग समानांतर चेक मीटर (Check Meter) लगाया जाएगा। दोनों मीटरों की रीडिंग की आपस में तुलना करके शुद्धता की जांच की जाएगी।
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हेल्पलाइन और शिकायत: किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या, रीडिंग में अंतर या शिकायत दर्ज कराने के लिए बिजली विभाग ने टोल फ्री नंबर 1912 जारी किया है, जिस पर कॉल करके तुरंत मदद ली जा सकती है।







