Humanity Prevails in Tilda: तिल्दा-नेवरा। छत्तीसगढ़ के तिल्दा-नेवरा-रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर शनिवार सुबह सोशल मीडिया और तमाशबीनों के इस दौर में इंसानियत की एक बेहद संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली मिसाल देखने को मिली। हाईवे से भटकते हुए ग्राम सड्डू पहुंची एक असहाय और मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला की स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने जिस संवेदनशीलता के साथ मदद की, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
भटकर गांव पहुंच गई थी महिला, घरों में घुसकर मांगा खाना
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 30 वर्ष की एक महिला पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में नेशनल हाईवे के किनारे भटक रही थी। राह चलते-चलते वह हाईवे से लगे ग्राम सड्डू के भीतर दाखिल हो गई। मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण महिला वहां कुछ घरों के भीतर घुस गई। उसने वहां रखा हुआ खाना खाया और मानसिक अवसाद या उत्तेजना में आकर घर के बर्तनों को उठाकर यहां-वहां फेंक दिया।
ग्रामीणों ने तमाशा बनाने के बजाय ढकने की कोशिश की लाज
आमतौर पर ऐसी घटनाओं में लोगों की भीड़ लग जाती है या लोग दूरी बना लेते हैं, लेकिन सड्डू गांव के नागरिकों ने गजब की इंसानियत का परिचय दिया। महिला की दयनीय और असहाय हालत को देखकर ग्रामीणों ने उसका मजाक उड़ाने या तमाशा खड़ा करने के बजाय तुरंत उसकी लाज ढकने का प्रयास किया। ग्रामीण महिलाएं और पुरुष कपड़े लेकर उसके पास पहुंचे और उसे पहनाने की कोशिश की।
हालांकि, अत्यधिक मानसिक तनाव और अस्वस्थता के कारण महिला लगातार इसका विरोध करती रही और उसने कपड़े पहनने से साफ इंकार कर दिया। इस दौरान वह रायपुरा के किसी ‘देवागन’ नामक व्यक्ति का नाम बार-बार पुकारते हुए गुस्से में गालियां भी दे रही थी।
धरसीवा पुलिस ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, भेजा नारी निकेतन
महिला की हिंसक होती स्थिति और कपड़ों के विरोध को देखते हुए ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना तुरंत धरसीवा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही धरसीवा पुलिस की एक टीम महिला आरक्षकों के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने बेहद सूझबूझ और संवेदनशीलता के साथ महिला को अपने सुरक्षा घेरे में लिया और उसे कपड़े पहनाए। इसके बाद महिला को गाड़ी में सुरक्षित बैठाकर रायपुर स्थित शासकीय नारी निकेतन (Shelter Home) भेज दिया गया है, जहां उसकी उचित देखरेख और मानसिक उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया के दौर में धरसीवा पुलिस की समाज से बड़ी अपील
इस पूरी घटना के बाद धरसीवा पुलिस और जिला प्रशासन ने आम नागरिकों की संवेदनशीलता की तारीफ करते हुए समाज के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है:
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है:
“आज के डिजिटल और स्मार्टफोन के दौर में अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी सड़क हादसे, विक्षिप्त व्यक्ति या असहाय महिला की मदद करने के बजाय उसका वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने में व्यस्त हो जाते हैं। यह बेहद अमानवीय कृत्य है। अगर आपको सड़क या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई भी व्यक्ति ऐसी असहाय, मानसिक रूप से कमजोर या विक्षिप्त स्थिति में मिले, तो कृपया उसका वीडियो या रील कतई न बनाएं। ऐसा करना किसी की निजता और सम्मान को ठेस पहुंचाता है। एक जागरूक नागरिक का फर्ज निभाते हुए तुरंत पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें।”







