Wednesday, September 9, 2026
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CG Liquor Scam Overtime Case: चर्चित शराब घोटाला मामले में 4 आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली नियमित जमानत; मुचलके पर रिहाई का आदेश

Chhattisgarh High Court
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CG Liquor Scam Overtime Case: बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े ओवरटाइम स्कैम प्रकरण में बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चार प्रमुख आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने आरोपी संजीव जैन और राजीव द्विवेदी सहित चारों आरोपियों को 10-10 लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया है।

बचाव पक्ष ने कोर्ट में रखे कई मजबूत और महत्वपूर्ण तर्क

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच प्रक्रिया और आरोपों की प्रकृति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई महत्वपूर्ण तर्क प्रस्तुत किए:

  • सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका पर सवाल: बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने सबसे प्रमुख मुद्दा सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका को लेकर उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि संबंधित कंपनी के मैनपावर कॉन्ट्रैक्ट का प्रत्यक्ष संचालन और प्रबंधन सिद्धार्थ सिंघानिया कर रहे थे। इसके बावजूद EOW ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया, जबकि कंपनी के निदेशकों को आरोपी बना दिया गया, जिनकी भूमिका पूरी तरह अलग थी।

  • मूल अपराध में गवाह, ओवरटाइम में आरोपी: बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शराब घोटाले के मूल अपराध (Original Offence) में संजीव जैन को जांच एजेंसी ने गवाह बनाया था, लेकिन इसी मामले से निकाले गए कथित ओवरटाइम घोटाले में उन्हें अचानक आरोपी बना दिया गया, जो विरोधाभासी है।

  • जांच में सहयोग और 18 महीने बाद गिरफ्तारी: कोर्ट को अवगत कराया गया कि आरोपी EOW द्वारा दिए गए हर नोटिस पर लगातार उपस्थित होते रहे और जांच में पूरा सहयोग करते रहे। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज होने के लगभग 18 महीने बाद, 4 मई 2026 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। जबकि मामले में जांच पूरी कर 18 मई 2026 को चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

  • समानता का सिद्धांत (Principle of Parity): सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि इसी ओवरटाइम स्कैम के एक अन्य सह-आरोपी को हाईकोर्ट पहले ही नियमित जमानत दे चुका है। इसलिए समानता के सिद्धांत के आधार पर इन आरोपियों को भी राहत मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी और जमानत का आधार

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देती, बल्कि मामले में दबावपूर्वक वसूली किए जाने के आरोप हैं।

अदालत ने अपने आदेश में मुख्य आधारों को रेखांकित किया:

  1. प्रकरण की विस्तृत जांच पूर्ण हो चुकी है और सक्षम अदालत में चार्जशीट पेश की जा चुकी है।

  2. आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं।

  3. आरोपी जांच प्रक्रिया में लगातार सहयोग करते रहे हैं।

इन परिस्थितियों और कानूनी आधारों को पर्याप्त मानते हुए हाईकोर्ट ने संजीव जैन, राजीव द्विवेदी सहित चारों आरोपियों की नियमित जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया।

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