Newborn Funeral On Road : सीहोर। जिला अस्पताल के बाहर से आई एक विचलित कर देने वाली तस्वीर ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। न्याय की आस में सड़क पर धरना दे रहे परिजनों द्वारा अपनी मृत नवजात बच्ची का सड़क पर ही अंतिम संस्कार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और स्थानीय व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला भैरूंदा निवासी संतोष जाट के परिवार से जुड़ा है। संतोष की पत्नी ने समय से पहले एक बच्ची को जन्म दिया था, जिसकी 5 जनवरी को इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण उनकी बच्ची की जान गई है। इसी गुस्से और न्याय की मांग को लेकर परिजन बच्ची के शव के साथ जिला अस्पताल के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए थे।
मामले में सिविल सर्जन उमेश श्रीवास्तव का कहना है कि बच्ची प्री-मैच्योर (समय से पूर्व जन्मी) थी और उसकी स्थिति काफी नाजुक थी। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। प्रशासन का यह भी दावा है कि परिजनों को शव ले जाने के लिए शव वाहन की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया और विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना।
इस हृदयविदारक घटना के बाद अब जिले में राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना व्यवस्था की लाचारी और संवेदनहीनता का चरम है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक गरीब पिता को अपनी संतान के लिए न्याय मांगने का हक नहीं है?
सड़क पर अंतिम संस्कार किए जाने के इस वीडियो ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे विरोध का एक तरीका बता रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि एक पिता को सड़क पर अपनी संतान का अंतिम संस्कार करना पड़ा। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है, लेकिन इस तस्वीर ने सीहोर के माथे पर एक गहरा कलंक लगा दिया है।













