Mohenjodaro Dancing Girl: NCERT ने कक्षा 9 की किताब में बदला ‘डांसिंग गर्ल’ का मूल स्वरूप, विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति

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Mohenjodaro Dancing Girl: नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) एक बार फिर अपनी पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को लेकर तीखे विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार विवाद की वजह कक्षा नौ (Class 9) की कला शिक्षा की नई पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा ‘डांसिंग गर्ल’ (Dancing Girl) की एक तस्वीर बनी है। पुस्तक में इस ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर की मूल तस्वीर के साथ छेड़छाड़ करते हुए उसके खुले धड़ को छायांकित (Shaded) करके ढका हुआ दिखाया गया है। एनसीईआरटी के इस कदम के बाद देश के प्रतिष्ठित इतिहासकारों, शिक्षाविदों और कला विशेषज्ञों ने इसकी प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।I was going to do a post on modern dance archives and the incredible photographic collections scattered in film archives when this interesting mascot for the ongoing International Museum Expo 2023 emerged.

4,000 साल पुरानी वैश्विक धरोहर के साथ छेड़छाड़

मोहनजोदड़ो से खुदाई के दौरान मिली करीब 4,000 साल पुरानी ‘डांसिंग गर्ल’ की यह कांस्य प्रतिमा भारतीय पुरातत्व और प्राचीन इतिहास की सबसे बड़ी और वैश्विक स्तर पर पहचानी जाने वाली धरोहरों में से एक है। नई पाठ्यपुस्तक में इस प्रतिमा के ऊपरी हिस्से को इस तरह से शेड किया गया है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि मूर्ति ने कपड़े पहने हुए हैं, जबकि वास्तविक और मूल प्रतिमा में ऐसा बिल्कुल नहीं है। कला जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी प्राचीन कलाकृति की मूल बनावट को इस तरह आधुनिक नैतिकता के चश्मे से देखना इतिहास के साथ अन्याय है।

विशेषज्ञों का तर्क: प्रामाणिकता और छात्रों के ज्ञान पर पड़ेगा असर

इस संशोधन को लेकर आलोचकों और इतिहासकारों का तर्क है कि छात्रों को इतिहास और कला की वास्तविक व प्रामाणिक तस्वीर दिखाई जानी चाहिए, न कि किसी वैचारिक या सामाजिक दृष्टिकोण से संशोधित रूप। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक कलाकृति की मूल संरचना में मनमाना बदलाव करने से उसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता पूरी तरह नष्ट हो जाती है। इससे भावी पीढ़ी और विद्यार्थियों तक कला और इतिहास को लेकर एक भ्रामक और गलत संदेश पहुंचेगा, जो शैक्षणिक मानकों के खिलाफ है।

विवाद बढ़ने पर NCERT ने दी सफाई

मामला तूल पकड़ने और चौतरफा घिरने के बाद एनसीईआरटी के निदेशक ने इस विषय पर अपनी सफाई पेश की है। निदेशक का कहना है कि पाठ्यपुस्तक की तस्वीर में किए गए इस बदलाव के पीछे संस्थान का कोई विशेष एजेंडा या कारण नहीं था। हालांकि, शैक्षणिक और बौद्धिक गलियारों में कड़े विरोध को देखते हुए संस्थान ने अब बैकफुट पर आते हुए इस पूरे मामले की गहन समीक्षा (Review) करने की बात कही है।

यह विवाद इसलिए भी अधिक गहरा गया है क्योंकि ‘डांसिंग गर्ल’ की यही वास्तविक तस्वीर पिछले कई दशकों से एनसीईआरटी की अलग-अलग कक्षाओं की इतिहास और संस्कृति की पुस्तकों में बिना किसी बदलाव के गरिमापूर्ण ढंग से प्रकाशित होती रही है। पूर्व में कभी भी इसके मूल स्वरूप को बदलने का प्रयास नहीं किया गया। यही कारण है कि यह मामला अब केवल एक तस्वीर के बदलने का नहीं, बल्कि देश में शैक्षणिक स्वतंत्रता, ऐतिहासिक सटीकता और सांस्कृतिक प्रस्तुतिकरण की निष्पक्षता को लेकर एक बड़ी राष्ट्रीय बहस का रूप अख्तियार कर चुका है।

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