Nishaanebaz News Desk-Nag Panchami 2026 Snake Skin Puja: नाग पंचमी 2026 का पर्व आज यानी 17 अगस्त को मनाया जा रहा है। सावन महीने की पंचमी तिथि होने के कारण इस दिन नागदेवता की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी बीच एक सवाल लोगों के मन में रहता है कि अगर नागदेवता की प्रतिमा उपलब्ध न हो तो क्या सांप की कैंचुली को प्रतीक मानकर पूजा की जा सकती है?
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार, नाग पंचमी 2026 पर सांप की कैंचुली को नाग का प्रतीक मानकर पूजा करने की धार्मिक मान्यता बताई जाती है। हालांकि, पूजा के लिए जीवित सांप को पकड़ना या उसे किसी तरह परेशान करना उचित नहीं है। सुरक्षित तरीके से नागदेवता की तस्वीर, प्रतिमा या मिट्टी के नाग की पूजा की जा सकती है।नाग पंचमी 2026 की पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम 7:23 बजे शुरू हुई और 17 अगस्त की शाम 7:22 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। उदया तिथि के अनुसार इस बार नाग पंचमी का पर्व सोमवार 17 अगस्त को मनाया जा रहा है।नाग पंचमी पर पूजा करने वाले श्रद्धालु नागदेवता को दूध, फूल, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन नाग पूजा को परिवार की सुरक्षा और सर्प भय से मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है।
कालसर्प दोष से जुड़ा क्या है नाग पंचमी का संबंध?
नाग पंचमी 2026 के उपाय की बात करें तो ज्योतिष में इस दिन को कालसर्प दोष से जुड़े उपायों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब कुंडली में राहु और केतु के बीच बाकी ग्रहों की स्थिति बनती है, तो इसे कालसर्प योग या दोष से जोड़ा जाता है।हालांकि, कालसर्प दोष को लेकर ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग मत भी मिलते हैं। इसलिए कुंडली से जुड़ा कोई बड़ा फैसला केवल सामान्य जानकारी के आधार पर लेने के बजाय योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से कुंडली का विश्लेषण कराना बेहतर माना जाता है।
पंचमी तिथि को ही क्यों होती है नाग पूजा?
नाग पंचमी 2026 से जुड़ी धार्मिक कथा महाभारत के समय की नाग यज्ञ की कहानी से भी जोड़ी जाती है। मान्यता के अनुसार राजा जन्मेजय ने नाग यज्ञ कराया था। इस यज्ञ में कई नाग अग्नि में जाने लगे थे।इसी दौरान आस्तिक नाम के ब्राह्मण ने यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की थी। धार्मिक परंपरा में माना जाता है कि यह घटना पंचमी तिथि से जुड़ी थी। इसी वजह से पंचमी को नाग पूजा के लिए विशेष महत्व मिलने की मान्यता बताई जाती है।
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नाग पंचमी पर मिट्टी के नाग की पूजा क्यों करें?
नाग पंचमी के उपाय में मिट्टी से नाग की आकृति बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है। श्रद्धालु मिट्टी के नाग बनाकर उन्हें जल, दूध, फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित कर सकते हैं।धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग स्थानों पर नाग पूजा की अलग विधियां मिलती हैं। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने की परंपरा भी बताई गई है। पूजा हमेशा अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक रीति के अनुसार की जा सकती है।
स्कंद पुराण में नाग पूजा को लेकर क्या नियम हैं?
नाग पंचमी 2026 पूजा विधि के संदर्भ में स्कंद पुराण में भी नाग पूजा से जुड़े नियमों का उल्लेख मिलता है। इसमें चतुर्थी को एक समय भोजन करने और पंचमी को नक्त भोजन करने की बात बताई गई है।इसके अलावा सोने, चांदी, लकड़ी या मिट्टी से पांच फन वाले नाग की आकृति बनाकर पूजा करने का उल्लेख मिलता है। घर के मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाकर दही, दूर्वा, फूल, गंध, अक्षत, धूप और दीप से पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है।
नाग पंचमी पर सांप की कैंचुली के साथ क्या करें?
नाग पंचमी के उपाय के दौरान अगर किसी के पास पहले से सांप की प्राकृतिक रूप से उतरी हुई कैंचुली है, तो कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में उसे नाग का प्रतीक मानकर पूजा करने की बात कही जाती है। लेकिन इसे धार्मिक नियम के रूप में हर जगह समान नहीं माना जाता।कैंचुली पाने के लिए सांप को पकड़ना, परेशान करना या उसके प्राकृतिक आवास से हटाना बिल्कुल जरूरी नहीं है। श्रद्धालु नागदेवता की तस्वीर या मिट्टी की प्रतिमा से भी पूजा कर सकते हैं।
कालसर्प दोष के लिए नाग पंचमी पर क्या उपाय बताए जाते हैं?
कालसर्प दोष के उपाय के तौर पर नाग पंचमी पर नागदेवता की पूजा, मंत्र जाप, दान और धार्मिक अनुष्ठान करने की ज्योतिषीय मान्यता है। कुछ लोग इस दिन विशेष रूप से कालसर्प योग शांति पूजा भी कराते हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसका उद्देश्य राहु-केतु से जुड़े कथित नकारात्मक प्रभावों को शांत करने की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। हालांकि, पूजा को किसी बीमारी, आर्थिक समस्या या जीवन की दूसरी परेशानी का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा क्यों मानी जाती है खास?
नाग पंचमी 2026 कालसर्प पूजा के संदर्भ में महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर का नाम भी काफी लिया जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं में त्र्यंबकेश्वर को कालसर्प योग शांति पूजा के प्रमुख स्थानों में माना जाता है।त्र्यंबकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और गोदावरी नदी के उद्गम से भी इसका धार्मिक संबंध है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।
नाग पंचमी पर क्या रखें सावधानी?
नाग पंचमी 2026 पर पूजा करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि जीवित सांपों के साथ किसी भी तरह का प्रयोग न किया जाए। सांप को दूध पिलाने की परंपरा लोकप्रिय है, लेकिन वन्यजीवों को पकड़ना या उन्हें जबरन पूजा में शामिल करना उचित नहीं है।पूजा के लिए मिट्टी के नाग, धातु की प्रतिमा या नागदेवता की तस्वीर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह धार्मिक परंपरा का पालन भी किया जा सकता है और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने से भी बचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
नाग पंचमी 2026 धार्मिक आस्था और नाग पूजा की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। सांप की कैंचुली को लेकर कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में पूजा की मान्यता बताई जाती है, लेकिन इसे अनिवार्य पूजा सामग्री नहीं माना जाना चाहिए। मिट्टी के नाग या नागदेवता की तस्वीर से भी पूजा की जा सकती है। वहीं कालसर्प दोष से जुड़े उपायों को ज्योतिषीय मान्यता के रूप में समझना चाहिए और किसी भी बड़े निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।





