Municipal Corporation House : जबलपुर: संस्कारधानी के नगर निगम सदन की बैठक आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब टैक्स डिमांड (कर मांग) से संबंधित प्रस्तावों को चर्चा के लिए पटल पर रखा गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नए टैक्स और कर वसूली की प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने जल्द ही एक बड़े विवाद का रूप ले लिया।
Municipal Corporation House : हंगामे की मुख्य जड़ नगर निगम द्वारा कर वसूली के लिए लाए गए नए प्रस्ताव और उनकी सख्ती है। विपक्षी पार्षदों ने इन प्रस्तावों का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में नया टैक्स थोपना अनुचित है। बहस के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष ने कर वसूली की तुलना ‘गुंडा वसूली’ से कर दी।
Municipal Corporation House : नेता प्रतिपक्ष के इस “गुंडा वसूली” वाले बयान पर सत्ता पक्ष के पार्षद आगबबूला हो गए। भाजपा पार्षदों और महापौर खेमे ने इसे नगर निगम प्रशासन और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों का अपमान बताते हुए सदन में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। पूरा सदन “नेता प्रतिपक्ष माफी मांगो” के नारों से गूंज उठा। सत्ता पक्ष का कहना था कि शहर के विकास के लिए राजस्व जरूरी है और इसे गुंडागर्दी कहना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।
Municipal Corporation House : विपक्ष अपनी बात पर अड़ा रहा कि कर वसूली के नाम पर आम नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि वसूली अमला नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई कर रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि बिना कर वसूली के शहर के विकास कार्य और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना असंभव है।
Municipal Corporation House : हंगामे और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। सभापति के बार-बार शांत रहने के आग्रह के बावजूद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा। इस विवाद के चलते शहर के विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। फिलहाल, सदन में तनाव की स्थिति बनी हुई है और सत्ता पक्ष माफी के बिना चर्चा आगे बढ़ाने के मूड में नहीं दिख रहा है।













