MP सरकार का बड़ा फैसला! गेहूं खरीदी व्यवस्था और मध्य-पूर्व संकट पर निगरानी के लिए समितियां गठित

Rahul Goshwami
CM Mohan Yadav

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर होने वाली गेहूं खरीदी को सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने गेहूं उपार्जन व्यवस्था की निगरानी और समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

इस समिति का उद्देश्य किसानों से समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीदी की व्यवस्था को बेहतर बनाना और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

कई वरिष्ठ मंत्री समिति में शामिल

सरकार द्वारा गठित इस समिति में कई वरिष्ठ मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है।

  • कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना को समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा सदस्य बनाए गए हैं।

  • मंत्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पशुपालन राज्यमंत्री लखन पटेल भी समिति के सदस्य होंगे।

समिति समय-समय पर बैठक कर समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी, बारदानों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी।

प्रशासनिक अधिकारियों की भी अहम भूमिका

समिति में प्रशासनिक स्तर पर भी वरिष्ठ अधिकारियों को जोड़ा गया है।

  • कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक होंगे।

  • खाद्य और कृषि विभाग के सचिव स्थायी आमंत्रित सदस्य रहेंगे।

समिति केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करते हुए मुख्यमंत्री को अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी। इसका कार्यकाल फिलहाल 30 जून 2026 तक निर्धारित किया गया है।

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मध्य-पूर्व संकट पर भी MP सरकार सतर्क

इधर मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे तनावपूर्ण हालात को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने एक और मंत्रिमंडलीय निगरानी समिति गठित की है। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लिया गया है।

इस समिति में

  • उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा,

  • मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और

  • मंत्री चैतन्य कश्यप को सदस्य बनाया गया है।

पेट्रोलियम और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर नजर

यह समिति अंतरराष्ट्रीय हालातों का आकलन करते हुए राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों, LPG गैस और उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखेगी।इसके अलावा समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई में किसी प्रकार की बाधा न आए।

राज्य सरकार को देगी नीतिगत सुझाव

समिति जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगी ताकि संभावित संकट की स्थिति में प्रदेश के नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस समिति में अपर मुख्य सचिव (खाद्य विभाग) सदस्य सचिव होंगे, जबकि वित्त, उद्योग और कृषि विभाग के सचिव स्थायी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। यह समिति अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

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