Thursday, September 10, 2026
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Security Breach at Ambikapur Observation Home: अंबिकापुर के ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर’ से रोशनदान की ग्रिल तोड़कर 3 अपचारी बालक फरार; पुलिस-प्रशासन में मचा हड़कंप

Security Breach at Ambikapur Observation Home: अंबिकापुर/सरगुजा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के उत्तरी संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर’ से तीन अपचारी बालकों के देर रात फरार हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना की भनक लगते ही पुलिस महकमे और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। फरार बालकों की तलाश के लिए पुलिस टीमों को तुरंत अलर्ट मोड पर रखते हुए आसपास के तमाम इलाकों में सघन चेकिंग और सर्च अभियान शुरू कर दिया गया है।

रोशनदान की ग्रिल तोड़कर देर रात हुए फरार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चोरी के विभिन्न मामलों में निरुद्ध तीन अपचारी बालकों को अंबिकापुर के प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर में रखा गया था।

  • घटना का तरीका: देर रात मौका पाकर तीनों बालकों ने सेंटर के रोशनदान में लगी लोहे की सुरक्षा ग्रिल को किसी तरह तोड़ दिया और उसी रास्ते से बाहर निकलकर भागने में सफल रहे।

  • पुलिस की त्वरित कार्रवाई: घटना की जानकारी मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीक निरीक्षण किया। आसपास की बस्तियों, मुख्य मार्गों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर तलाशी अभियान बढ़ा दिया गया है।

क्या होता है ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर’?

नियमों के मुताबिक, प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर (Place of Safety Center) में 16 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम आयु के उन अपचारी बालकों को सुरक्षित निरुद्ध रखा जाता है:

  1. जिन पर जघन्य अथवा गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप होते हैं।

  2. जिनके मामलों की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड (JJB) या सक्षम न्यायालय में विचाराधीन होती है।

गंभीर प्रकृति के मामलों के आरोपियों के लिए बनाए गए इस सेंटर से बालकों का भाग निकलना सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार उठ रहे गंभीर सवाल

अंबिकापुर में सरकारी सुधार गृहों और संप्रेषण केंद्रों से बालकों के भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व ही अंबिकापुर के बाल संप्रेषण गृह से भी 13 अपचारी बालकों के फरार होने की बड़ी घटना सामने आई थी। उस समय भी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर जैसी संवेदनशील जगह से रोशनदान तोड़कर तीन बालकों का भाग निकलना जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की भारी लापरवाही को उजागर करता है।

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